
नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दिल्ली में चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच पुलिसकर्मियों के साथ कथित धक्का-मुक्की और बदसलूकी का मुद्दा सामने आया है। दिल्ली पुलिस की डीसीपी सृष्टि पांडे ने प्रदर्शन में शामिल युवाओं से अपने आचरण और उसके संभावित कानूनी परिणामों पर गंभीरता से विचार करने की अपील की है।
डीसीपी के मुताबिक, कानून व्यवस्था संभालने के लिए ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों के साथ हिंसक व्यवहार या अभद्रता को सामान्य नहीं माना जा सकता। उन्होंने कहा कि विरोध दर्ज कराना लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन प्रदर्शन के दौरान कानून और दूसरों की सुरक्षा का ध्यान रखना भी जरूरी है।
पुलिस का दावा, कुछ कर्मियों को बनाया गया निशाना
डीसीपी सृष्टि पांडे ने कहा कि हाल के प्रदर्शनों के दौरान कुछ वर्दीधारी पुलिसकर्मियों के साथ कथित तौर पर धक्का-मुक्की और मारपीट की घटनाएं सामने आई हैं। पुलिस का आरोप है कि कुछ प्रदर्शनकारियों ने सरकारी ड्यूटी में बाधा डालने की कोशिश की।
उन्होंने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि कानून के तहत अपनी जिम्मेदारी निभा रहे पुलिसकर्मियों पर हाथ उठाना या उन्हें नुकसान पहुंचाने की कोशिश करना गंभीर विषय है। उनके मुताबिक, ऐसे व्यवहार का असर संबंधित व्यक्ति के भविष्य पर भी पड़ सकता है।
SIR को लेकर दिल्ली में लगातार प्रदर्शन
दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर पिछले कुछ दिनों से राजनीतिक विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। कांग्रेस और INDIA गठबंधन से जुड़े नेता मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
विपक्षी दलों का आरोप है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया में अनियमितताएं हुई हैं और चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लेकर सवाल खड़े हुए हैं। दूसरी ओर चुनाव आयोग और बीजेपी ने चुनावी प्रक्रिया में गड़बड़ी और राजनीतिक पक्षपात के आरोपों को खारिज किया है। इस मुद्दे पर दोनों पक्षों के बीच राजनीतिक मतभेद बने हुए हैं।
प्रदर्शन के दौरान टकराव, पुलिस ने शुरू की जांच
पुलिस के अनुसार, विरोध प्रदर्शनों के दौरान कुछ स्थानों पर सुरक्षाकर्मियों के साथ कथित धक्का-मुक्की और सरकारी काम में बाधा पहुंचाने की शिकायतें मिली हैं। इन घटनाओं से जुड़े मामलों में पुलिस ने कानूनी कार्रवाई भी शुरू की है।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, घटनास्थल के वीडियो और सोशल मीडिया पर सामने आए रिकॉर्ड की जांच की जा रही है। इसका उद्देश्य कथित घटनाओं में शामिल लोगों की पहचान करना और आरोपों से जुड़े तथ्यों को सामने लाना है।
7 अक्टूबर को हुए विपक्षी प्रदर्शन को लेकर भी पुलिसकर्मियों से कथित मारपीट और सरकारी कार्य में बाधा डालने के आरोपों में प्राथमिकी दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, प्राथमिकी में दर्ज आरोपों का अदालत में प्रमाणित होना अभी बाकी है।
पुलिस कार्रवाई पर भी उठे सवाल
विरोध प्रदर्शनों के दौरान केवल प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव ही मुद्दा नहीं रहा। कुछ महिला पत्रकारों ने भी प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों पर कथित यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। इन शिकायतों की जांच दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा को सौंपी गई है।
जांच के तहत सीसीटीवी फुटेज और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की समीक्षा किए जाने की बात सामने आई है। वहीं दिल्ली पुलिस ने महिला प्रदर्शनकारियों से दुर्व्यवहार के कुछ आरोपों को खारिज किया है।
17 प्रदर्शनकारियों को अदालत से मिली जमानत
मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन से जुड़े एक मामले में गिरफ्तार 17 प्रदर्शनकारियों को दिल्ली की एक अदालत ने जमानत दी थी। अदालत ने मामले की परिस्थितियों के साथ आरोपियों की उम्र और उनके भविष्य से जुड़े पहलुओं पर भी विचार किया।
जमानत मिलने का अर्थ आरोपों से बरी होना नहीं है। मामले में लगाए गए आरोपों पर अंतिम न्यायिक निष्कर्ष अभी बाकी है।
पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी
फिलहाल दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर राजनीतिक प्रदर्शन जारी हैं। एक ओर पुलिस प्रशासन सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने और कथित हिंसक घटनाओं की जांच में जुटा है, वहीं विपक्षी दल चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों पर अपना विरोध जारी रखने की बात कह रहे हैं।
डीसीपी सृष्टि पांडे ने युवाओं से अपील की है कि विरोध दर्ज कराते समय वे अपने व्यवहार के दूरगामी प्रभावों को समझें। वहीं लोकतांत्रिक विरोध के दौरान पुलिस से भी कानून के मुताबिक संयम और निष्पक्ष व्यवहार की अपेक्षा रहती है। संबंधित घटनाओं में वास्तविक स्थिति जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही स्पष्ट होगी।




















