Vithya Ramraj Brokes PT Usha Record : एशियन गेम्स 2026 में भारतीय एथलेटिक्स के लिए विथ्या रामराज ने एक और यादगार उपलब्धि हासिल की है। महिलाओं की 400 मीटर हर्डल्स स्पर्धा में विथ्या ने 54.75 सेकंड का समय निकालकर ब्रॉन्ज मेडल जीता। इस प्रदर्शन के साथ उन्होंने महान भारतीय एथलीट पीटी ऊषा का 42 साल पुराना राष्ट्रीय रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिया।

पीटी ऊषा ने 1984 के लॉस एंजिलिस ओलंपिक में 400 मीटर हर्डल्स की दौड़ 55.42 सेकंड में पूरी की थी। लंबे समय तक यह भारतीय एथलेटिक्स के रिकॉर्ड में दर्ज रहा। अब विथ्या ने अपने प्रदर्शन से इस रिकॉर्ड को नया मुकाम दिया है।

साधारण परिवार से निकलकर एथलेटिक्स के शिखर तक पहुंचीं विथ्या

विथ्या रामराज की कामयाबी की कहानी उनके खेल प्रदर्शन जितनी ही प्रेरक है। उनका परिवार आर्थिक रूप से साधारण पृष्ठभूमि से आता है। उनके पिता ट्रक ड्राइवर हैं, जबकि विथ्या को खेल की दुनिया में आगे बढ़ाने का फैसला उनकी मां ने लिया था।

शुरुआत में परिवार और गांव के स्तर पर उनके इस फैसले को लेकर सवाल उठे। इसके बावजूद उनकी मां ने बेटी के सपने को आगे बढ़ाने का फैसला किया। संसाधनों की कमी के बीच विथ्या ने प्रशिक्षण जारी रखा और धीरे-धीरे राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई।

जब 25 हजार के जूतों के लिए भी परिवार के पास नहीं थे पैसे

विथ्या के शुरुआती संघर्ष का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उनके परिवार के पास एथलेटिक्स के लिए जरूरी जूते खरीदने तक के पैसे नहीं थे। बताया जाता है कि जिन जूतों की जरूरत थी, उनकी कीमत करीब 25 हजार रुपये थी।

विथ्या ने सीमित संसाधनों में अभ्यास और प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेना जारी रखा। करियर के शुरुआती दौर में उन्हें पैरों में चोट और खून आने के बावजूद दौड़ पूरी करनी पड़ी। मुश्किल हालात उनके रास्ते में आते रहे, लेकिन उन्होंने खेल छोड़ने का फैसला नहीं किया।

बीमारी और सर्जरी के बाद भी नहीं छोड़ा ट्रैक

कोरोना महामारी के दौरान विथ्या की तबीयत काफी खराब हुई थी। इसके बाद उन्हें अपेंडिसाइटिस की सर्जरी भी करानी पड़ी। स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों के चलते परिवार की ओर से उन्हें खेल छोड़ने की सलाह दी गई थी।

हालांकि विथ्या ने वापसी का रास्ता चुना। उन्होंने दोबारा प्रशिक्षण शुरू किया और प्रतियोगिताओं में वापसी करते हुए अपने प्रदर्शन को लगातार बेहतर किया। अब एशियन गेम्स में रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन उनके लंबे संघर्ष का अहम पड़ाव बन गया है।

एशियन गेम्स में लगातार दूसरी बार मिला पदक

विथ्या रामराज के लिए एशियन गेम्स 2026 का ब्रॉन्ज मेडल खास इसलिए भी है क्योंकि यह प्रतियोगिता में उनका दूसरा पदक है। इससे पहले उन्होंने 4×100 मीटर रिले में सिल्वर मेडल जीता था।

विथ्या इससे पहले 2023 में हांगझोउ एशियन गेम्स में भी 400 मीटर हर्डल्स में ब्रॉन्ज मेडल हासिल कर चुकी हैं। इस तरह उन्होंने लगातार दो एशियन गेम्स में इस स्पर्धा में पदक जीतने की उपलब्धि हासिल की है।

42 साल पुराने रिकॉर्ड को तोड़ने से लेकर एशियन गेम्स में लगातार पदक जीतने तक, विथ्या रामराज की कहानी भारतीय एथलेटिक्स में उनके बढ़ते कद और लंबे संघर्ष की एक अहम मिसाल बनकर सामने आई है।

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