मध्य प्रदेश के लाखों पेंशनर्स को बकाया एरियर्स के भुगतान के लिए अभी और इंतजार करना पड़ सकता है। एरियर्स का भुगतान नहीं होने को लेकर सरकार के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू होने के बाद राज्य सरकार ने विभागों को इस मामले में कानूनी कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। सरकार की ओर से संबंधित विभागों से कोर्ट से स्टे ऑर्डर हासिल करने को कहा गया है।

किन अवधि के एरियर्स को लेकर जारी हुआ नया निर्देश

राज्य सरकार ने 21 सितंबर को इस संबंध में आदेश जारी किया। इसमें छठवें और सातवें वेतनमान से जुड़े एरियर्स के भुगतान के मामले का उल्लेख किया गया है।आदेश के मुताबिक 1 जनवरी 2006 से 31 अगस्त 2008 के बीच के 32 महीने के एरियर्स और 1 जनवरी 2016 से 31 मार्च 2018 के बीच के 27 महीने के एरियर्स को लेकर कार्रवाई की जानी है। सरकार ने संबंधित विभागों को न्यायालय में स्टे प्राप्त करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए कहा है।इस निर्देश में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ से जुड़े मामले का भी उल्लेख कि गया है।

एरियर्स का भुगतान हुआ तो सरकार पर कितने करोड़ का भार पड़ेगा

एरियर्स का मामला बड़ी वित्तीय राशि से जुड़ा हुआ है। छठवें वेतनमान के तहत करीब 2.46 लाख पेंशनर्स को 32 महीने के बकाया एरियर्स का लाभ मिलना है। इस हिस्से की अनुमानित राशि करीब 400 करोड़ रुपये बताई गई है।वहीं सातवें वेतनमान के तहत 1 जनवरी 2016 से जुलाई 2018 की अवधि से जुड़े करीब 4.50 लाख पेंशनर्स के एरियर्स की राशि लगभग 4000 करोड़ रुपये बताई गई है।इस तरह दोनों मामलों को मिलाकर करीब 4400 करोड़ रुपये की राशि का मामला सामने आता है। सरकार की ओर से भुगतान टलने की स्थिति में इतनी बड़ी राशि तत्काल जारी करने का दबाव भी नहीं रहेगा।

अवमानना की कार्रवाई से बचने के लिए सरकार ने उठाया कानूनी रास्ता

एरियर्स के भुगतान को लेकर अलग अलग स्तर पर न्यायिक कार्रवाई चल रही है। भुगतान में देरी के चलते सरकार के खिलाफ अवमानना के मामले भी सामने आ रहे हैं। इसी स्थिति को देखते हुए सरकार ने विभागों को कोर्ट से स्टे लेने की दिशा में आगे बढ़ने के निर्देश दिए हैं।इसका मतलब यह है कि फिलहाल एरियर्स के भुगतान का रास्ता सीधे तौर पर आगे बढ़ने के बजाय न्यायिक प्रक्रिया से जुड़ गया है।

सुप्रीम कोर्ट में भी चल रहा है मामला, फैसले का इंतजार

पेंशनर्स के एरियर्स का विवाद केवल मध्य प्रदेश तक सीमित नहीं है। देश के अलग अलग राज्यों में इस तरह के मामलों में हाईकोर्ट के स्तर पर भुगतान को लेकर आदेश सामने आए हैं। वहीं, इस पूरे विषय से जुड़ा मामला सुप्रीम कोर्ट में भी विचाराधीन है।मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की डबल बेंच की ओर से भी यह बात सामने आई है कि मामला संवैधानिक पीठ के समक्ष है और वहां से निर्णय आने की स्थिति स्पष्ट होने के बाद आगे की कार्रवाई की जानी चाहिए।फिलहाल पेंशनर्स के एरियर्स का भुगतान न्यायिक प्रक्रिया से जुड़ा हुआ है। आगे सरकार और संबंधित विभागों की कार्रवाई अदालतों के आदेशों पर निर्भर करेगी।

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