रायपुर: जहां चुनौती बड़ी होती है, वहां अपनी जगह बनाए रखना आसान नहीं होता। इसके लिए संगठन की क्षमता के साथ लोगों का विश्वास भी जरूरी होता है। कोयला खदानों में काम करने वाले श्रमिकों के बीच यही भरोसा किसी भी यूनियन की वास्तविक ताकत माना जाता है। कोल इंडिया की खदानों में हुए एकल सदस्यता सत्यापन के सामने आए परिणामों में इंटक को अलग-अलग क्षेत्रों में मिला समर्थन इसी ओर इशारा करता है।एशिया की सबसे बड़ी कोयला खदानों में शामिल गेवरा क्षेत्रीय इकाई में 10 और 11 सितंबर को हुए सत्यापन में इंटक को 121 मत मिले। कुल 454 मतों में NOTA को 134, एटक को 98, बीएमएस को 80 और केएमएस (एचएमएस) को 21 मत प्राप्त हुए। इसके अलावा सिंघाली में इंटक पहले और कुसमुंडा में दूसरे स्थान पर रही।

भटगांव की सात इकाइयों में दबदबा बरकरार तो सिंघाली में पहला और कुसमुंडा में दूसरा स्थान

भटगांव क्षेत्र में इंटक ने सात इकाइयों से कुल 185 मत हासिल किए। AHQ में 23, भटगांव UG में 71, नवापारा में 14, शिवानी में 58, दुग्गा SA में 3, कल्याणी में 5 और जगन्नाथपुर में 11 मत मिले। इनमें भटगांव UG और शिवानी के आंकड़े संगठन के लिए खासे अहम रहे। वहीं दूसरी ओर 2025 के सिंगल मेंबरशिप सत्यापन में इंटक को 114 मत मिले थे। इस बार यह संख्या 185 तक पहुंच गई। एक साल के भीतर 71 मतों की यह बढ़ोतरी संगठन के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इसके साथ ही गेवरा के 121, भटगांव की सात इकाइयों के 185, सिंघाली में पहला और कुसमुंडा में दूसरा स्थान अलग-अलग क्षेत्रों में मिले समर्थन की तस्वीर पेश करता है। इंटक नेताओं का कहना है कि संसाधनों की होड़ के बीच भी कामगारों का साथ मिलना संगठन के लिए सबसे बड़ी पूंजी है।

संजय सिंह बोले, हमने कोई ऐसा वादा नहीं किया जिसे पूरा न कर सकें

इंटक के संयुक्त महामंत्री संजय सिंह ने कहा कि भटगांव क्षेत्र में सत्यापन के दौरान सत्ता और धनबल का प्रभाव साफ तौर पर दिखाई दिया। उनके मुताबिक, कुछ संगठनों की ओर से लोगों को अपने पक्ष में करने के लिए अलग-अलग तरह के प्रयास किए गए।उन्होंने आरोप लगाया कि एचएमएस और बीएमएस से जुड़े लोगों ने लोगों के बीच जाकर छाता, पैसा, साड़ी, सूट और मिठाई बांटी। इसके जरिए सत्यापन में समर्थन हासिल करने की कोशिश की गई। संजय सिंह ने कहा कि इंटक की ओर से किसी श्रमिक को न तो गलत प्रलोभन दिया गया और न ही ऐसा आश्वासन किया गया, जिसे पूरा करना संभव नहीं हो।उन्होंने कहा कि इंटक के साथ खड़े रहने वाले साथियों और कामगारों के प्रति संगठन की जिम्मेदारी अब और बढ़ गई है। जिन लोगों ने विश्वास जताया है, उनके साथ संगठन हर परिस्थिति में खड़ा रहेगा।

राजेंद्र सिंह देव ने कहा, संघर्ष से बनी पहचान

क्षेत्रीय महामंत्री राजेंद्र सिंह देव ने कहा कि सदस्यता सत्यापन के दौरान सत्ता, स्थानीय जनप्रतिनिधियों की दखल और प्रलोभनों के जरिए कई संगठनों ने अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश की। इसके बावजूद इंटक के साथ श्रमिकों का जुड़ाव बना रहा।उन्होंने कहा कि इंटक की पहचान किसी प्रभाव या संसाधन से नहीं, बल्कि लंबे समय से श्रमिकों के सुख-दुख में साथ खड़े रहने से बनी है। यही वजह है कि विपरीत परिस्थितियों में भी संगठन को कामगारों का समर्थन मिला।क्षेत्रीय अध्यक्ष रविंद्र सिंह ने कहा कि श्रमिकों के हितों की रक्षा करना संगठन की प्राथमिकता है। जिन लोगों ने इंटक के प्रति भरोसा जताया है, उनकी अपेक्षाओं और अधिकारों के लिए संगठन आगे भी मजबूती से आवाज उठाएगा।

सदस्यता नहीं अधिकारों की आवाज मजबूत करने का संकल्प

क्षेत्रीय प्रवक्ता चंचल सिंह ने कहा कि सदस्यता का आंकड़ा अपने आप में अंतिम लक्ष्य नहीं है। इसके पीछे कामगारों की एकजुटता और अपने अधिकारों के लिए खड़े होने की भावना जुड़ी है। उन्होंने कहा कि इसी आधार पर इंटक आगे भी श्रमिकों के मुद्दों को लेकर लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष करती रहेगी। उन्होंने कहा कि गेवरा, सिंघाली, कुसमुंडा और भटगांव से मिले परिणामों ने सभी सदस्यों
का उत्साह बढ़ाया है और संगठन को आगे और मजबूत करने की जिम्मेदारी भी बढ़ाई है।

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