
Sunil Lodhi Hanuman Ansh: नीब करौरी बाबा के जीवन से प्रेरित फिल्म ‘हनुमान अंश’ इन दिनों दर्शकों के बीच खास पहचान बना रही है। करीब 2 करोड़ रुपये के बजट में तैयार हुई इस फिल्म ने अब तक 8.50 करोड़ रुपये की कमाई कर ली है। फिल्म की कहानी के साथ इसके भजन भी लोगों को खूब पसंद आ रहे हैं। इन्हीं में सुनील लोधी की आवाज में गाया गया भजन ‘मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान’ भक्तों के बीच काफी लोकप्रिय हो चुका है।
लेकिन जिस आवाज ने आज हजारों लोगों का ध्यान खींचा है, उसके पीछे संघर्ष और जज्बे से भरी लंबी कहानी है। मध्य प्रदेश के सागर जिले के रहने वाले सुनील लोधी ने तमाम मुश्किलों के बीच संगीत को अपना जीवन बनाया और इसी साधना ने उन्हें फिल्म तक पहुंचा दिया।
परिवार के साथ फिल्म देखने पहुंचे सुनील
फिल्म में अपनी आवाज देने के बाद सुनील लोधी हाल ही में अपने परिवार के साथ सागर पहुंचे और ‘हनुमान अंश’ फिल्म देखी। इस दौरान उन्होंने विस्तार न्यूज़ से बातचीत में फिल्म से जुड़े अपने अनुभव साझा किए।
उन्होंने बताया कि संगीत के सफर में कई उतार-चढ़ाव आए, लेकिन उन्होंने कभी इसे छोड़ने का फैसला नहीं किया। फिल्म में भजन गाने का मौका भी उन्हें अचानक नहीं मिला, बल्कि यह उनके वर्षों के अभ्यास, मेहनत और संगीत के प्रति लगातार बने समर्पण का नतीजा है।
दृष्टिबाधित होने के बावजूद संगीत को बनाया ताकत
सुनील लोधी सागर जिले में जैसीनगर के पास बसे छोटे से गांव तालचिरी के रहने वाले हैं। वह जन्म से दृष्टिबाधित हैं, लेकिन इस चुनौती को उन्होंने अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। बचपन से ही संगीत उनके जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा और उन्होंने इसी को आगे बढ़ने का रास्ता बनाया।
एक तमूरा को अपना साथी बनाकर उन्होंने संगीत की शुरुआत की। सीमित संसाधनों के बावजूद वह लगातार अभ्यास करते रहे और धीरे-धीरे स्थानीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाने में सफल हुए।
संघर्ष ने पहुंचाया बड़े मंच तक
सुनील लोधी की कहानी उन लोगों के लिए प्रेरणा है जो मुश्किल परिस्थितियों के कारण अपने सपनों से पीछे हट जाते हैं। दृष्टिबाधित होने के बावजूद उन्होंने संगीत को साधना की तरह अपनाया और वर्षों तक अपनी कला को निखारते रहे।
आज उनकी आवाज एक बड़े पर्दे की फिल्म में सुनाई दे रही है। ‘हनुमान अंश’ में भजन गाने का अवसर उनके लिए केवल फिल्म का हिस्सा बनने की उपलब्धि नहीं, बल्कि उस लंबे संघर्ष की पहचान है जिसमें उन्होंने तमूरा से शुरुआत कर अपनी आवाज को लोगों तक पहुंचाया।
उनका सफर यह बताता है कि परिस्थितियां कितनी भी चुनौतीपूर्ण क्यों न हों, लगातार मेहनत, हुनर और विश्वास के दम पर छोटे से गांव से निकली आवाज भी बड़े मंच तक पहुंच सकती है।




















