नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी तनाव एक बार फिर सीधे सैन्य टकराव में बदल गया है। अमेरिकी सेना की ओर से ईरान में नए हमलों के बाद तेहरान ने जवाबी कार्रवाई तेज कर दी है। ईरान ने जॉर्डन, कुवैत और बहरीन में अमेरिकी हितों और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया है। इस घटनाक्रम ने पूरे खाड़ी क्षेत्र में तनाव को और बढ़ा दिया है और संघर्ष के व्यापक युद्ध में बदलने की आशंका फिर गहरा गई है।

अमेरिका ने ईरान में किन ठिकानों को बनाया निशाना?

अमेरिकी सेना ने 1 सितंबर को ईरान के दक्षिणी हिस्से में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC से जुड़े ठिकानों पर हमले किए। अमेरिकी पक्ष के अनुसार, कार्रवाई में एयर डिफेंस सिस्टम, रडार, संचार ढांचे, समुद्री सैन्य संसाधनों और समुद्री सुरंग बिछाने से जुड़ी क्षमताओं को निशाना बनाया गया।अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, कार्रवाई की पृष्ठभूमि में ईरान की ओर से वाणिज्यिक जहाजों और अमेरिकी सैन्यकर्मियों के लिए पैदा किया गया खतरा भी शामिल था। रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी सेना ने दो ईरानी सरकारी टैंकरों को भी निशाना बनाया।

ईरान ने जॉर्डन, कुवैत और बहरीन में किया पलटवार

अमेरिकी हमलों के कुछ ही घंटों बाद ईरान ने मिसाइल और ड्रोन हमले शुरू कर दिए। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने जॉर्डन स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकाने पर भारी बैलिस्टिक मिसाइल हमला करने का दावा किया।जॉर्डन की सेना के अनुसार, ईरान से दागी गई 13 बैलिस्टिक मिसाइलों में से 10 को उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने रोक दिया, जबकि तीन मिसाइलें आबादी से दूर इलाकों में गिरीं। शुरुआती जानकारी में किसी अमेरिकी ठिकाने पर हताहत की पुष्टि नहीं हुई है।कुवैत में भी सैन्य अधिकारियों ने मिसाइल और ड्रोन हमलों के खिलाफ वायु रक्षा कार्रवाई की जानकारी दी। बहरीन में भी ईरानी ड्रोन हमलों की खबर सामने आई है और वहां वायु रक्षा प्रणालियों को सक्रिय किया गया।

अब सबसे बड़ी चिंता स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर

इस पूरे संघर्ष में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज सबसे महत्वपूर्ण मोर्चा बन गया है। दुनिया के तेल कारोबार के लिए यह बेहद अहम समुद्री मार्ग है। यहां किसी भी तरह की सैन्य गतिविधि या जहाजों की आवाजाही में बाधा का असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है।हालिया घटनाक्रम में इस जलमार्ग के आसपास वाणिज्यिक टैंकरों को लेकर भी घटनाएं सामने आई हैं। इससे तेल आपूर्ति बाधित होने की आशंका बढ़ी है।

कच्चे तेल की कीमतों में फिर उछाल

अमेरिका और ईरान के बीच ताजा सैन्य कार्रवाई का असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर भी दिखाई देने लगा है। बुधवार को ब्रेंट क्रूड 0.92 फीसदी बढ़कर 95.52 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया, जबकि WTI क्रूड 91.02 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंचा। दोनों प्रमुख बेंचमार्क में इससे पहले के सत्र में भी 4 डॉलर से ज्यादा की तेजी आई थी।यदि होर्मुज में तेल की आवाजाही लंबे समय तक प्रभावित होती है, तो ऊर्जा कीमतों पर दबाव और बढ़ सकता है।

दोनों तरफ से बढ़ी चेतावनी

ताजा हमलों के बाद अमेरिका और ईरान के बीच बयानबाजी भी तेज हो गई है। ईरानी नेतृत्व ने अमेरिकी कार्रवाई का जवाब देने की बात कही है, जबकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी ईरान की ओर से आगे किसी जवाबी कार्रवाई की स्थिति में और कड़े कदम उठाने की चेतावनी दी है।

क्या क्षेत्रीय युद्ध का खतरा बढ़ गया है?

अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि संघर्ष पूर्ण क्षेत्रीय युद्ध में बदल जाएगा, लेकिन खतरा निश्चित रूप से बढ़ा है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि जवाबी कार्रवाई अब केवल अमेरिका और ईरान के क्षेत्र तक सीमित नहीं रही, बल्कि जॉर्डन, कुवैत और बहरीन जैसे देशों में मौजूद अमेरिकी हित भी इसकी चपेट में आ गए हैं।इसके साथ ही होर्मुज में बढ़ता तनाव और तेल टैंकरों से जुड़ी घटनाएं इस संघर्ष को सैन्य मोर्चे के साथ-साथ वैश्विक ऊर्जा संकट का रूप भी दे सकती हैं। आने वाले घंटों में अमेरिका की अगली कार्रवाई और ईरान की प्रतिक्रिया इस बात के लिए बेहद महत्वपूर्ण होगी कि तनाव और कितना बढ़ता है।

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