
ग्वालियर। शहर की जर्जर और गड्ढों से भरी सड़कों को लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच ने सख्त रुख अपनाया है। मंगलवार को जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान डबल बेंच ने सड़क निर्माण और रखरखाव से जुडी व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए अधिकारियों और ठेकेदारों को कड़ी फटकार लगाई।अदालत ने साफ संकेत दिया कि सड़क निर्माण में सरकारी धन के इस्तेमाल और गुणवत्ता के साथ किसी तरह की अनियमितता सामने आने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।
जांच रिपोर्ट में गड़बड़ी मिली तो बढ़ेगी मुश्किल
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि सड़कों की गुणवत्ता को लेकर तैयार की जाने वाली जांच रिपोर्ट में यदि किसी भी स्तर पर हेरफेर या अनियमितता सामने आती है, तो संबंधित अधिकारियों और ठेकेदारों के खिलाफ केवल सिविल कार्रवाई तक मामला सीमित नहीं रहेगा। परिस्थितियों के अनुसार आपराधिक मामला भी दर्ज किया जा सकता है।इस टिप्पणी के साथ अदालत ने सड़क निर्माण में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी अधिकारियों पर स्पष्ट रूप से डाल दी है।
सरकारी पैसे के इस्तेमाल पर भी कोर्ट की नजर
सुनवाई के दौरान बेंच ने सरकारी राशि के उपयोग को लेकर भी कड़ी टिप्पणी की। अदालत ने कहा, ‘100 रुपये आए और 10 खर्च हुए तो कार्रवाई पक्की समझो।’कोर्ट की इस टिप्पणी को सड़क निर्माण के लिए जारी सरकारी धन के संभावित दुरुपयोग और वित्तीय अनियमितताओं के प्रति गंभीर चेतावनी के तौर पर देखा जा रहा है।
जनहित याचिका के बाद बढ़ी निगरानी
ग्वालियर की सड़कों की खराब स्थिति को लेकर दायर जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान अदालत का रुख यह संकेत दे रहा है कि सड़क निर्माण की गुणवत्ता और उस पर खर्च होने वाली सरकारी राशि की निगरानी अब गंभीरता से होगी। यदि जांच में लापरवाही, गड़बड़ी या भ्रष्टाचार से जुडे तथ्य सामने आते हैं तो संबंधित अधिकारियों और निर्माण एजेंसियों पर कार्रवाई की राह खुल सकती है।




















