
Chhattisgarh News: रायपुर. भाजपा के प्रदेश संगठन में आने वाले दिनों में बड़े बदलाव की अटकलें तेज हो गई हैं. प्रदेशाध्यक्ष किरणदेव की स्वास्थ्य स्थिति और आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों को देखते हुए पार्टी संगठन में फेरबदल की चर्चा शुरू हो गई है. हालांकि भाजपा के नेता फिलहाल प्रदेश अध्यक्ष बदले जाने की किसी भी संभावना से इनकार कर रहे हैं.
झांसी के पास सड़क हादसे में घायल हुए किरणदेव का झांसी मेडिकल कॉलेज के बाद गुरुग्राम स्थित मेदांता अस्पताल में उपचार हुआ था. उनके पैर और कमर के नीचे ऑपरेशन किया गया है. वे करीब पखवाड़े से नई दिल्ली स्थित छत्तीसगढ़ निवास में स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं. 23 अगस्त को ऑपरेशन के बाद उनके टांके खोले जाने की जानकारी सामने आई है. ऐसे में उनके इसी महीने छत्तीसगढ़ लौटने की संभावना जताई जा रही है. हालांकि चिकित्सकों के अनुसार पूरी तरह स्वस्थ होने में अभी समय लग सकता है.
सक्रियता नहीं लौटी तो नए अध्यक्ष पर विचार संभव
भाजपा के भीतर चर्चा है कि यदि किरणदेव पूरी तरह स्वस्थ नहीं हो पाए और उन्होंने स्वास्थ्य कारणों से कुछ और समय मांगा, तो पार्टी नए प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति पर विचार कर सकती है. विधानसभा चुनाव में करीब दो साल का समय शेष है और पार्टी संगठन को चुनावी तैयारियों के लिए जल्द ही पूरी सक्रियता के साथ मैदान में उतरना होगा.
भाजपा के जानकारों के मुताबिक पार्टी में कार्यवाहक या कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने की परंपरा नहीं रही है. राष्ट्रीय स्तर पर संगठन के हालिया बदलावों के बाद मोर्चा और प्रकोष्ठों की कार्यकारिणी के गठन की प्रक्रिया भी पूरी होनी है. आगामी महीनों में संगठनात्मक गतिविधियां तेज होने के साथ पार्टी दिसंबर तक अधिकांश प्रक्रियाएं पूरी करने की तैयारी में है, ताकि जनवरी 2027 से चुनावी तैयारियों को गति दी जा सके.
‘एक व्यक्ति, एक पद’ को लेकर भी चर्चा
भाजपा महिला मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद सांसद रूपकुमारी चौधरी प्रदेश उपाध्यक्ष के पद से कब मुक्त होंगी और उनके स्थान पर किसे जिम्मेदारी मिलेगी, इसे लेकर भी पार्टी में चर्चा है. वहीं सीजीएमएससी के अध्यक्ष दीपक म्हस्के को राष्ट्रीय स्तर पर सोशल मीडिया संयोजक की जिम्मेदारी मिलने के बाद उनके पद को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. पार्टी की ‘एक व्यक्ति, एक पद’ की परंपरा के तहत बदलाव होने की स्थिति में किसी नए नेता को जिम्मेदारी मिलने की संभावना जताई जा रही है.
उपाध्यक्ष का एक पद भी रिक्त
प्रदेश अध्यक्ष के साथ प्रदेश उपाध्यक्ष का एक पद भी रिक्त है. पार्टी में छह उपाध्यक्ष पद हैं, इसलिए एक पद रिक्त रहने से संगठन के कामकाज पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा. इसके बावजूद पार्टी लंबे समय तक यह पद खाली रखने के पक्ष में नहीं दिख रही है, क्योंकि उपाध्यक्षों को विधानसभा क्षेत्रों और जिलों की जिम्मेदारियां भी सौंपी गई हैं.
हाल ही में नई दिल्ली में हुई राष्ट्रीय पदाधिकारियों की बैठक में प्रदेश अध्यक्ष की अनुपस्थिति में उपाध्यक्ष ने छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व किया. अब पार्टी नेतृत्व की नजर किरणदेव की स्वास्थ्य स्थिति और उनके दोबारा सक्रिय होने की क्षमता पर बनी हुई है. फिलहाल संगठन में बदलाव को लेकर चर्चाएं जरूर तेज हैं, लेकिन भाजपा की ओर से कोई आधिकारिक निर्णय सामने नहीं आया है.




















