
मध्य प्रदेश : रीवा जिले में बाढ़ की गंभीर स्थिति के बीच मानवीय संवेदनाओं को झकझोर देने वाली तस्वीर सामने आई है। सिरमौर विधानसभा क्षेत्र के जवा जनपद में एक परिवार को अपने परिजन के अंतिम संस्कार से पहले शव को घर तक पहुंचाने के लिए बेहद मुश्किल रास्ता अपनाना पड़ा। बाढ़ का पानी रास्ते में बाधा बना तो ग्रामीणों ने दो ड्रमों को बांधकर अस्थायी साधन तैयार किया और उसी के सहारे शव को पानी के पार ले गए।
बाढ़ के कारण घर तक नहीं पहुंच सका शव
मामला जवा जनपद की ग्राम पंचायत रौली का बताया जा रहा है। गांव निवासी मोतीलाल तिवारी का रीवा स्थित संजय गांधी अस्पताल में निधन हो गया था। अस्पताल से उनका शव गांव लाया गया, लेकिन लगातार बाढ़ के कारण घर तक पहुंचने वाला रास्ता पानी में डूबा हुआ था।परिजनों और ग्रामीणों के सामने सबसे बड़ी चुनौती शव को सुरक्षित तरीके से घर तक पहुंचाने की थी। सामान्य रास्ता बाधित होने के कारण कोई वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध नहीं थी।
दो ड्रम जोड़कर बनाया अस्थायी सहारा
स्थिति को देखते हुए ग्रामीणों ने स्थानीय स्तर पर जुगाड़ तैयार किया। दो ड्रमों को आपस में बांधा गया और उनके ऊपर शव रखा गया। इसके बाद ग्रामीण बाढ़ के पानी के बीच से इस अस्थायी साधन को खींचकर शव को घर तक ले गए।
शव घर पहुंचने के बाद अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की गई। इस घटना की तस्वीर सामने आने के बाद बाढ़ प्रभावित इलाकों में प्रशासनिक तैयारियों और बुनियादी सुविधाओं को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
मदद नहीं मिलने के ग्रामीणों ने लगाए आरोप
ग्रामीणों का आरोप है कि शव को घर तक पहुंचाने के लिए जब स्थानीय महिला सरपंच से सहायता मांगी गई, तो कथित तौर पर उन्हें मदद नहीं मिली। ग्रामीणों के मुताबिक, सरपंच और उनके देवर तथा जीआरएस विवेक तिवारी ने कथित रूप से यह कहते हुए सहायता से इनकार किया कि यह उनका काम नहीं है।
ग्रामीणों ने इस कथित रवैये पर नाराजगी जताते हुए प्रशासन से पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है। हालांकि, इस संबंध में संबंधित पक्ष का आधिकारिक पक्ष सामने आना अभी बाकी है।
एक तस्वीर ने दिखा दी बाढ़ प्रभावित गांवों की असली परेशानी
बाढ़ के दौरान सड़क और संपर्क मार्ग बंद होने से ग्रामीण पहले ही जरूरी सेवाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। लेकिन किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसके शव को घर तक पहुंचाने के लिए भी स्थानीय लोगों को अपने स्तर पर व्यवस्था करनी पड़े, तो यह आपदा प्रबंधन की जमीनी तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
रीवा की यह घटना केवल एक परिवार की परेशानी नहीं दिखाती, बल्कि यह भी बताती है कि बाढ़ जैसे संकट के समय प्रभावित गांवों तक जरूरी सहायता और आपातकालीन सेवाएं पहुंचाना प्रशासन के लिए कितनी बड़ी चुनौती बनी हुई है।




















