
एक संचालक दुकान बंद कर हुआ फरार, कई प्रतिष्ठानों का देर शाम होने के कारण नहीं हो सका निरीक्षण, आरटीआई से सामने आया शासकीय भूमि पर मेडिकल दुकान के लिए एनओसी का मामला
अम्बिकेश गुप्ता
कुसमी। बलरामपुर-रामानुजगंज कलेक्टर एवं सीएमएचओ के निर्देशन तथा अनुविभागीय अधिकारी राजस्व कुसमी के मार्गदर्शन में शुक्रवार को स्वास्थ्य, राजस्व एवं पुलिस विभाग की संयुक्त टीम ने कुसमी नगर में संचालित मेडिकल स्टोर, क्लीनिक एवं पैथोलॉजी लैब का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान कई मेडिकल प्रतिष्ठानों में नियमों से संबंधित कमियां सामने आईं। वहीं कार्रवाई की जानकारी मिलते ही एक मेडिकल स्टोर संचालक दुकान बंद कर मौके से फरार हो गया। देर शाम तक चली कार्रवाई के कारण नगर के कई मेडिकल स्टोर, क्लीनिक एवं पैथोलॉजी लैब का निरीक्षण भी नहीं हो सका।
उल्लेखनीय है कि बलरामपुर क्षेत्र के ग्राम जमुआटांड़ में कथित झोलाछाप डॉक्टर द्वारा इंजेक्शन लगाए जाने के बाद मासूम बच्चे की मौत के मामले के पश्चात जिला प्रशासन स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर अलर्ट मोड पर है। इसी क्रम में जिले के विभिन्न अनुविभागों में मेडिकल स्टोर, क्लीनिक, पैथोलॉजी लैब एवं अवैध रूप से चिकित्सा कार्य करने वालों की जांच की जा रही है।
इन प्रतिष्ठानों का हुआ निरीक्षण..
शुक्रवार को कुसमी नगर में हुई संयुक्त जांच टीम में राजस्व विभाग से नायब तहसीलदार कुसमी अनुग्रह केरकेट्टा, स्वास्थ्य विभाग से विकासखंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. सतीश पैकरा, बीपीएम अनूप बड़ा, बीईटीओ जीतेन्द्र सोलंकी, फार्मासिस्ट अदिति गुप्ता तथा पुलिस विभाग की टीम शामिल रही। संयुक्त टीम ने नगर में संचालित मैत्री मेडिकल, प्रियल मेडिकल, श्री श्याम मेडिकल, श्री कृष्णा मेडिकल, आकाश मेडिकल, मिमसाद मेडिकल, फातिमा मेडिकल, मुन्ना मेडिकल, शिफा आयुष होम्यो क्लीनिक, सैफ मेडिकल, रिम्शा मेडिकल, सृष्टि मेडिकल, न्यू सूर्या क्लीनिक एवं वेदमाता पैथोलॉजी का निरीक्षण किया। वहीं टीम के पहुंचने से पूर्व शिव महिमा मेडिकल एवं शिव महिमा मेडिकोज बंद मिले। इसके अलावा देर शाम होने के कारण आरना मेडिकल, श्रीराम मेडिकल, कुशवाहा पैथोलॉजी, सैफ मेडिकोज सहित अन्य दवा दुकानों एवं क्लीनिकों का निरीक्षण नहीं किया जा सका।
मैत्री मेडिकल में एच-1 रजिस्टर नहीं, प्रियल मेडिकल में कैमरा भी नहीं..
निरीक्षण के दौरान मैत्री मेडिकल में एच-1 रजिस्टर संधारित नहीं होना पाया गया। वहीं प्रियम मेडिकल में सीसीटीवी कैमरा नहीं लगा होना सामने आया। इसके अतिरिक्त संयुक्त टीम के अनुसार आकाश मेडिकल, मिमसाद मेडिकल, फातिमा मेडिकल, सैफ मेडिकल एवं रिम्शा मेडिकल में एक्सपायरी इंजेक्शन पाए गए। स्वास्थ्य विभाग द्वारा संबंधित मामलों में नियमानुसार अग्रिम कार्रवाई किए जाने की बात कही गई है। टीम ने सभी मेडिकल स्टोर संचालकों एवं लैब संचालकों को नियमों का पालन करने की हिदायत दी। साथ ही बिना वैध अनुमति अथवा निर्धारित योग्यता के चिकित्सा कार्य किए जाने पर विधि सम्मत कार्रवाई की चेतावनी दी गई।
सीसीटीवी कैमरे चालू रखने के निर्देश..
निरीक्षण के दौरान मेडिकल स्टोर एवं अन्य संबंधित प्रतिष्ठानों में निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाने तथा उन्हें हमेशा चालू रखने के निर्देश दिए गए। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े प्रतिष्ठानों की नियमित निगरानी की जाएगी तथा नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर कार्रवाई की जाएगी।
आरटीआई से सामने आया शासकीय भूमि पर मेडिकल दुकान के लिए एनओसी का मामला..
इधर, "संचार टुडे सीजी/एमपी" के पास सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत प्राप्त दस्तावेजों से एक अन्य महत्वपूर्ण मामला भी सामने आया है। प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार कुसमी नगर में संचालित एक मेडिकल दुकान के लिए खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग के समक्ष प्रस्तुत दस्तावेजों में नगर पंचायत कुसमी द्वारा जारी अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) भी शामिल है। आरटीआई से प्राप्त दस्तावेजों में संबंधित स्थल की भूमि शासकीय भूमि होने की जानकारी सामने आने का दावा है। ऐसे में शासकीय भूमि पर निजी मेडिकल दुकान के संचालन के लिए नगर पंचायत द्वारा एनओसी किस आधार पर जारी की गई, यह अब जांच का विषय बन गया है।
शासकीय भूमि पर एनओसी जारी करने की प्रक्रिया पर सवाल..
यदि संबंधित भूमि वास्तव में शासकीय भूमि है तो उस पर निजी व्यवसायिक गतिविधि संचालित करने के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया, भूमि के उपयोग की अनुमति, स्वामित्व संबंधी अभिलेख तथा संबंधित अधिकारियों द्वारा किए गए दस्तावेजी सत्यापन की जांच आवश्यक हो जाती है। साथ ही यह भी जांच का विषय है कि मेडिकल दुकान का लाइसेंस जारी करते समय खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग के समक्ष प्रस्तुत एनओसी एवं अन्य दस्तावेजों का किस स्तर पर सत्यापन किया गया था। यदि प्रशासनिक जांच में यह तथ्य सामने आता है कि शासकीय भूमि की वास्तविक स्थिति को छिपाकर अथवा गलत तथ्यों के आधार पर एनओसी प्राप्त की गई और उसी के आधार पर औषधि विक्रय का लाइसेंस हासिल किया गया, तो संबंधित दस्तावेजों, एनओसी जारी करने की प्रक्रिया तथा लाइसेंस प्राप्त करने में शामिल पक्षों की भूमिका की भी जांच की आवश्यकता होगी।
संयुक्त जांच से खुल सकती है पूरी प्रक्रिया की पोल..
मामले की गंभीरता को देखते हुए राजस्व विभाग, नगर पंचायत कुसमी तथा खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग द्वारा भूमि के स्वामित्व, भूमि उपयोग, एनओसी जारी करने की प्रक्रिया, प्रस्तुत दस्तावेजों एवं मेडिकल लाइसेंस जारी किए जाने के आधार की संयुक्त रूप से जांच की जाए तो पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है। आरटीआई से प्राप्त दस्तावेजों में सामने आई जानकारी के आधार पर यह भी सवाल उठ रहा है कि यदि संबंधित भूमि शासकीय है तो लंबे समय से वहां मेडिकल दुकान का संचालन किस अनुमति के आधार पर किया जा रहा है और नगर पंचायत द्वारा एनओसी जारी करने से पहले भूमि संबंधी अभिलेखों का सत्यापन किया गया था या नहीं..?
ग्रामीण क्षेत्रों में भी होगी सख्त कार्रवाई..
विकासखंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. सतीश पैकरा के अनुसार कुसमी नगर के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी अवैध रूप से संचालित दवा दुकानों, क्लीनिकों एवं झोलाछाप चिकित्सकों की जांच की जाएगी। बिना निर्धारित योग्यता या वैध अनुमति के चिकित्सा कार्य करते पाए जाने वालों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। शुक्रवार को हुई संयुक्त निरीक्षण कार्रवाई से मेडिकल स्टोर संचालकों एवं अवैध रूप से चिकित्सा कार्य करने वालों में हड़कंप की स्थिति रही। निरीक्षण में सामने आई कमियों पर स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई सभी की निगाहेँ टिकी हुई है और आरटीआई से सामने आए शासकीय भूमि पर एनओसी एवं मेडिकल लाइसेंस के मामले में प्रशासन जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाता है या नहीं यह पूरा मामला जांच का विषय हैं।




















