देश में चीनी की बढ़ती कीमतों ने महंगाई को लेकर नई बहस छेड़ दी है। पिछले कुछ दिनों में चीनी के भाव में तेज वृद्धि देखने को मिली है। इसी मुद्दे को लेकर आम आदमी पार्टी के संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने केंद्र की मोदी सरकार पर निशाना साधा है। केजरीवाल ने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि फैसलों के असर का सही आकलन नहीं किया गया।

थोक से फुटकर बाजार तक बढ़े दाम

उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक 31 जुलाई को चीनी की थोक कीमत करीब 44 रुपये प्रति किलो थी। इसके बाद अगस्त में लगातार तेजी दर्ज की गई। 20 अगस्त तक थोक बाजार में भाव करीब 60 रुपये किलो और खुदरा बाजार में करीब 65 रुपये किलो तक पहुंचने की बात कही गई है।

इस तेजी ने आने वाले त्योहारी मौसम को लेकर भी चिंता बढ़ा दी है। सितंबर से त्योहारों का दौर शुरू होने वाला है और इस अवधि में चीनी की मांग बढ़ने की संभावना रहती है। ऐसे में कीमतों पर दबाव बना रहा तो घरेलू बजट पर इसका असर और बढ़ सकता है।

एथनॉल नीति को लेकर केजरीवाल ने उठाए सवाल

केजरीवाल ने सोशल मीडिया पर वीडियो साझा कर केंद्र सरकार की एथनॉल नीति पर सवाल उठाया। उनका तर्क है कि पेट्रोलियम आयात पर खर्च होने वाली विदेशी मुद्रा बचाने के उद्देश्य से गन्ने का इस्तेमाल एथनॉल उत्पादन में बढ़ाया गया, जिससे चीनी की उपलब्धता प्रभावित हुई।

उन्होंने आरोप लगाया कि अब घरेलू बाजार में कमी पूरी करने के लिए चीनी का आयात करना पड़ सकता है। केजरीवाल ने इसी आधार पर सरकार के फैसलों की आलोचना करते हुए कहा कि नीति बनाने से पहले उसके संभावित परिणामों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया।

कांग्रेस ने भी महंगाई को लेकर घेरा

चीनी के बढ़ते भाव पर कांग्रेस ने भी केंद्र सरकार को निशाने पर लिया। पार्टी ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए आरोप लगाया कि महंगाई का सीधा असर आम परिवारों की रोजमर्रा की जरूरतों पर पड़ रहा है। कांग्रेस ने चीनी के बढ़े हुए खुदरा भाव को घरेलू खर्च बढ़ने से जोड़ते हुए सरकार की आर्थिक नीतियों पर सवाल उठाए।

एक साल में मिल कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी

उपलब्ध जानकारी के अनुसार एक साल पहले चीनी की मिल कीमत करीब 3,900 रुपये प्रति क्विंटल थी। अब यह औसत स्तर करीब 5,400 से 5,500 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है। यानी पिछले एक साल में मिल स्तर पर कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज हुई है।

उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक 18 अगस्त को चीनी की औसत खुदरा कीमत करीब 52.3 रुपये प्रति किलो रही, जबकि एक साल पहले यह करीब 46.34 रुपये प्रति किलो थी। इस आधार पर खुदरा कीमत में लगभग 13 प्रतिशत की सालाना बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

त्योहारी सीजन से पहले कीमतों पर नजर

चीनी की कीमतों में मौजूदा तेजी ऐसे समय आई है जब देश में त्योहारी मांग बढ़ने वाली है। मिठाई, बेकरी और घरेलू इस्तेमाल में चीनी की खपत बढ़ने से बाजार पर अतिरिक्त दबाव बन सकता है। ऐसे में आने वाले दिनों में कीमतों की दिशा आम उपभोक्ताओं के साथ सरकार और चीनी उद्योग दोनों के लिए महत्वपूर्ण रहेगी।

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