
सूरजपुर: छत्तीसगढ़ के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों में समग्र शिक्षा के अंतर्गत संचालित व्यावसायिक शिक्षा से जुड़े सैकड़ों व्यावसायिक प्रशिक्षकों के सब्र का बांध अब टूट चुका है। वर्षों से निरंतर अपनी सेवाएँ दे रहे प्रशिक्षकों ने अपनी लंबे समय से लंबित मांगों और सेवा संबंधी गंभीर समस्याओं को लेकर राज्य सरकार और प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ नवीन व्यावसायिक प्रशिक्षक कल्याण संघ के जिलाध्यक्ष सूरजपुर विजय कुमार राठौर और उपाध्यक्ष दिनेश कुमार प्रजापतिकी अगुवाई में कलेक्टरेट एवं शिक्षा विभाग पहुंचकर जिला कलेक्टर महोदय तथा जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) दोनों को 16 सूत्रीय मांगों का एक ज्ञापन सौंपा गया। संघ ने स्पष्ट किया है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) और नीति आयोग की रिपोर्ट में व्यावसायिक शिक्षा व कौशल विकास को स्कूली शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने तथा प्रशिक्षकों की संविदात्मक व्यवस्था की कमियों को दूर करने पर जोर दिया गया है, लेकिन जमीनी स्तर पर विद्यार्थियों को ब्यूटी एंड वेलनेस, आईटी, ऑटोमोबाइल, हेल्थकेयर, एग्रीकल्चर और रिटेल जैसे 15 ट्रेडों में गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण देने वाले प्रशिक्षकों का खुद का भविष्य अंधकारमय बना हुआ है।
ज्ञापन में बताया गया कि प्रदेश के 1,285 विद्यालयों में कार्यरत 1,029 से अधिक व्यावसायिक प्रशिक्षक थर्ड पार्टी (कंपनी) आधारित व्यवस्था, अल्प मानदेय और नौकरी के असुरक्षित माहौल में काम करने को मजबूर हैं। विगत 10 वर्षों में निरंतर सेवा देने के बावजूद मानदेय में केवल 3,000 रुपये की क्रमिक वृद्धि की गई है, जो वर्तमान महंगाई के दौर में बेहद अपर्याप्त है। इसके अलावा 1,029 प्रशिक्षकों का मई और जून माह का मानदेय अब तक अटका हुआ है, साथ ही PAB 2025-26 के तहत स्वीकृत 1,000 रुपये प्रतिमाह मानदेय वृद्धि की 12,000 रुपये की एरियर्स राशि का भुगतान भी नहीं किया गया है। इतना ही नहीं, नवीन निविदा के नाम पर हेल्थ केयर ट्रेड के 121 अनुभवी प्रशिक्षकों का मानदेय 23,000 रुपये से घटाकर 20,000 रुपये कर दिया गया है तथा लक्ष्य (Lakshya) कंपनी द्वारा 4 प्रशिक्षकों को बिना किसी ठोस कारण के सेवा से पृथक कर दिया गया है। साथ ही इंडस्ट्रियल विजिट (IV) और गेस्ट लेक्चर (GL) की राशि में 25% से 40% तक की कटौती की जा रही है और इंडस (Indus) व ग्राम तरंग (Gram Tarang) जैसी कंपनियों द्वारा लंबित राशि का भुगतान नहीं किया गया है।
जिलाध्यक्ष विजय कुमार राठौर और उपाध्यक्ष दिनेश कुमार प्रजापति की अगुवाई में जिला कलेक्टर एवं जिला शिक्षा अधिकारी को सौंपे गए इस ज्ञापन में संघ ने हरियाणा व दिल्ली राज्य की तर्ज पर 38,100 रुपये प्रतिमाह मानदेय देने, प्रतिवर्ष नियमित वेतनवृद्धि लागू करने, थर्ड पार्टी कंपनी व्यवस्था समाप्त कर विभागीय समायोजन करने, निष्कासित 4 प्रशिक्षकों को बहाल करने, 20 दिन के आकस्मिक अवकाश सहित मेडिकल, मातृत्व व ग्रीष्मकालीन अवकाश की स्पष्ट नीति बनाने, और गैर-व्यावसायिक कार्यों में न लगाने की पुरजोर मांग की है। इसके साथ ही विगत तीन वर्षों से बिना प्रशिक्षक चल रहे 478 विद्यालयों में तत्काल नई पदस्थापना करने की भी मांग रखी गई है। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी जायज मांगों पर जल्द ही सहानुभूतिपूर्वक और सकारात्मक कार्यवाही नहीं की गई, तो प्रदेश भर के व्यावसायिक प्रशिक्षक उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।




















