
बस्तर : जंगल और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में ग्रामीणों की सामुदायिक भागीदारी की एक मिसाल सामने आई है। जगदलपुर से करीब 40 किलोमीटर दूर शहीद वीर क्रांतिकारी गुंडाधुर की जन्मभूमि नेतानार के बिजलीपारा में युवाओं और ग्रामीणों ने मिलकर जंगल, जल और पर्यावरण को बचाने की मुहिम शुरू की है।
इस पहल की सबसे खास बात यह है कि इसके लिए ग्रामीण किसी बाहरी मदद का इंतजार नहीं कर रहे, बल्कि खुद श्रमदान कर निस्तार क्षेत्र को संवारने में जुटे हैं।
पहले हटाया लैंटाना, अब खाली जमीन पर लगाए जा रहे उपयोगी पौधे
ग्राम सभा नेतानार के बिजलीपारा स्थित निस्तार क्षेत्र और मरघट स्थल में इस अभियान की शुरुआत हुई। 16 जून को ग्रामीणों और युवाओं ने करीब 2 एकड़ क्षेत्र में फैले आक्रामक खरपतवार लैंटाना यानी जहाज लाटा को हटाकर इलाके की सफाई की थी।
सफाई के बाद ग्रामीणों ने तय किया कि खाली हुई जमीन का इस्तेमाल पौधारोपण और जल संरक्षण के लिए किया जाएगा। इसी निर्णय के तहत 16 अगस्त को युवाओं और ग्रामीणों ने दोबारा श्रमदान किया।
इस दौरान जामुन, अर्जुन, बांस और जपरा यानी लाल सिंदूर जैसे उपयोगी पौधों का रोपण किया गया। इसके साथ ही बारिश के पानी को जमीन के भीतर पहुंचाने और भूजल स्तर को बेहतर करने के उद्देश्य से Water Absorption Trench यानी WAT की खुदाई भी की गई।
48 में से 44 परिवारों ने लिया हिस्सा, हर घर से पहुंचा एक सदस्य
इस अभियान में ग्रामीणों की भागीदारी भी उल्लेखनीय रही। बिजलीपारा में कुल 48 घर हैं, जिनमें से 44 परिवारों के सदस्य श्रमदान के लिए पहुंचे। प्रत्येक परिवार से एक सदस्य ने अभियान में हिस्सा लिया।
एकल महिलाओं वाले परिवारों को श्रमदान के लिए शामिल नहीं किया गया। वहीं ग्राम स्तर पर बनाई गई समिति के सदस्यों ने भी अभियान में सक्रिय भूमिका निभाई।
करीब साढ़े तीन घंटे तक चले इस अभियान में ग्रामीणों ने दोपहर 12 बजे से शाम 3:30 बजे तक मिलकर काम किया।
ग्रामीण बोले, जंगल बचाना है तो समुदाय को आगे आना होगा
ग्राम स्तर पर गठित समिति के अध्यक्ष धनीराम और सचिव सोनू के मुताबिक जंगल और निस्तार क्षेत्र को सुरक्षित रखने के लिए ग्रामीणों और युवाओं की सक्रिय भागीदारी बेहद जरूरी है। उनका कहना है कि लैंटाना हटाने के बाद खाली हुई जमीन पर उपयोगी पौधे लगाए जा रहे हैं और साथ ही पानी को संरक्षित करने के लिए WAT तैयार किया जा रहा है।
इस पहल का उद्देश्य केवल पौधे लगाना नहीं, बल्कि जंगल और प्राकृतिक संसाधनों को लंबे समय तक सुरक्षित रखना है।
पूरे नेतानार क्षेत्र के लिए तैयार की गई सामुदायिक वन प्रबंधन योजना
सामुदायिक वन संसाधन प्रबंधन समिति के कोषाध्यक्ष फुलसिंग ने बताया कि ग्राम सभा नेतानार की पारंपरिक सीमा के भीतर सामुदायिक वन संसाधन प्रबंधन की योजना तैयार की गई है। इसमें गांव के पारंपरिक वन क्षेत्रों और वनभूमि को शामिल किया गया है।
योजना के तहत आने वाले समय में ग्राम सभा के अलग-अलग पारा और जंगल क्षेत्रों में संरक्षण, पौधारोपण, जल संरक्षण और अन्य सामुदायिक गतिविधियां की जाएंगी।
उन्होंने बताया कि ग्राम सभा नेतानार की सामुदायिक वन संसाधन यानी CFR प्रबंधन योजना जिला प्रशासन के सामने प्रस्तुत की जा चुकी है। इसके तहत सामुदायिक वन क्षेत्र में संरक्षण और संवर्धन के साथ जल संरक्षण, जैव विविधता बचाने तथा स्थानीय आजीविका से जुड़े काम चरणबद्ध तरीके से किए जाएंगे।
युवाओं और ग्रामीणों ने दिया साफ संदेश, जंगल की जिम्मेदारी भी समुदाय की
गुंडाधुर की जन्मभूमि नेतानार के बिजलीपारा में शुरू हुई यह पहल सिर्फ पौधारोपण तक सीमित नहीं है। ग्रामीणों ने श्रमदान के जरिए यह संदेश दिया है कि जंगल और पर्यावरण की रक्षा केवल सरकारी विभागों का काम नहीं है।
जब स्थानीय समुदाय खुद अपने प्राकृतिक संसाधनों की जिम्मेदारी उठाता है, तो संरक्षण का प्रयास ज्यादा मजबूत और टिकाऊ बन सकता है। बिजलीपारा के ग्रामीणों की यह पहल आने वाली पीढ़ियों के लिए जंगल बचाने और प्राकृतिक संसाधनों को सुरक्षित रखने की सामुदायिक सोच को मजबूत करने वाली मिसाल बन रही है।




















