खगड़िया। फर्जी आईएएस मनीष कुमार गुप्ता की भौकाल ऐसी थी कि कोई भी चकमा खा जाते थे। अधिकारी जैसा रौब, बातचीत की लच्छेदार शैली उसकी खासियत थी।शनिवार को पुलिस गिरफ्त में आने के बाद पुलिस टीम भी उसकी भौकाल से कुछ देर के लिए दिग्भ्रमित रह गई। एसपी भानू प्रताप सिंह के निर्देश पर गठित टीम ने गोगरी-जमालपुर के मनीष कुमार गुप्ता के घर पर जब दबिश दी, तो लोगों में तरह-तरह की चर्चाएं होने लगी।उसकी शान शौकत, विदेशी वाहन से लेकर हावभाव को देखकर आसपास के लोग भी मानते थे कि मनीष केंद्र सरकार का बड़ा अधिकारी है। वैसे वह घर में ही पैक रहता था।

आईएएस का फर्जी आईडी कार्ड दिखाकर वह अपना भौकाल बनाए हुए था। गोगरी- जमालपुर में उसका करोड़ों का आलीशान मकान है।लेकिन गलत करने वालों की पोल एक न एक दिन जरूर खुलती है और मनीष का भी काला सच समाज के सामने आ गया।जबसे भानू प्रताप सिंह की पदस्थापना खगड़िया एसपी के रूप में हुई है तबसे अंतिम पंक्ति के लोग भी मान रहे हैं कि उनके साथ कोई अन्याय नहीं कर सकता।लोग अपने घरों से सीधे एसपी से मिलने एसपी कार्यालय आ जाते हैं। एसपी उनकी समस्याओं को बारीकी से सुनते हैं और निदान को लेकर त्वरित कार्रवाई भी करते हैं।

एसपी द्वारा इंटरनेट मीडिया पर हाल ही में एक पोर्टल बनाया गया है, जिसमें लोगों से अपील की गई है कि वे बिना भय के किसी तरह की सूचना दें, त्वरित कार्रवाई होगी और उनका नाम गुप्त रखा जाएगा। जानकारी के अनुसार उसी पोर्टल पर फर्जी आईएएस मनीष गुप्ता के बारे में किसी ने महत्वपूर्ण सूचना दी।एसपी ने टीम गठित की और त्वरित कार्रवाई की गई। पुलिस और डीआईयू टीम की गोगरी जमालपुर स्थित मनीष गुप्ता के घर पर की गई छापेमारी के बाद सारे राज सामने आ गए।

बताया जाता है कि फर्जी आईएएस मनीष गुप्ता के यहां पुलिस छापेमारी चल रही थी और दिल्ली से पटना तक के कई ताकतवर लोग वरीय पुलिस अधिकारी से पैरवी को लेकर फोन करते रहे।इससे जाहिर होता है कि मनीष अपना भौकाल दिल्ली से पटना तक कायम किए हुए था। कई लोगों का तो यह भी कहना हुआ कि खगड़िया एसपी के रूप में भानू प्रताप सिंह नहीं होते, तो आसानी से मनीष गुप्ता को जाल में नहीं फंसाया जा सकता था।एसपी भानू प्रताप सिंह ने समय पर कार्रवाई की और मनीष गुप्ता को भागने का कोई अवसर नहीं मिला। वह पुलिस की मजबूत घेराबंदी में फंस गया।

गोगरी-जमालपुर के कई लोगों का कहना है कि उसके करोड़ों रुपये के मकान का कई वर्षों से निर्माण हो रहा है। एक प्राध्यापक के पुत्र कम समय में करोड़ों का मालिक कैसे बन गया, यह पुलिस टीम को भी अचंभित कर गया।

दिल्ली से लेकर कई शहरों में उसकी संपत्ति होने की बात कही जा रही है। कहा तो यह भी जा रहा है कि विदेशों में भी उसकी संपत्ति है।बहरहाल, फर्जी धंधे में संलिप्त कितना ही ताकतवर क्यों ना हो, पुलिस और कानून से नहीं बच सकता है, यही मनीष गुप्ता के साथ हुआ।मनीष कुमार गुप्ता लंबे समय से फर्जी आईएएस बनकर अपना भौकाल कायम किए हुए था। कई अधिकारी आए और चले गए, मगर किन्हीं की नजर इस नटवरलाल पर नहीं पड़ी।

सूत्रों के अनुसार कहीं ना कहीं मैनेज के बल पर वह भौकाल कायम किए हुए था। उसके घर पर छापेमारी और उसकी गिरफ्तारी के बाद सच सामने आया।

पांच मोबाइलों के सीडीआर खोलेंगे राज

पुलिस और डीआइयू टीम द्वारा उसके घर से विभिन्न कंपनियों के पांच मोबाइल जब्त किए गए हैं। मोबाइलों का लॉक खोलने को लेकर पुलिस लगातार प्रयास की।परंतु गिरफ्तार मनीष लॉक बताने से परहेज करते रहा। ऐसे में अंदेशा है कि मोबाइल में बड़े- बड़े राज छुपे हुए हैं। एसपी भानू प्रताप सिंह द्वारा टीम को निर्देश दिया गया है कि उसके स्वजन अथवा किसी तकनीक का सहारा लेकर मोबाइल का लॉक खोलकर उसकी गहन जांच की जाए।पूरी संभावना है कि मोबाइल का सीडीआर निकालने बाद जब गहन जांच होगी, तो कई बड़े- बड़े लोग जांच के घेरे में आ सकते हैं। कई सफेदपोश पर से भी पर्दा उठा सकता है।

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