MP Mausam:  मध्यप्रदेश में इस बार मानसून उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पा रहा है। प्रदेश में अब तक करीब 16.3 इंच बारिश दर्ज की गई है, जो सामान्य औसत से लगभग 18 से 19 फीसदी कम है। बारिश की कमी का असर राजधानी भोपाल समेत प्रदेश के कई बड़े जिलों में भी दिखाई दे रहा है।इंदौर, उज्जैन, जबलपुर जैसे 40 से अधिक जिलों में बारिश का आंकड़ा सामान्य से नीचे बना हुआ है। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश के कई हिस्सों में मानसून की कमजोर सक्रियता से सूखे जैसे हालात बनने लगे हैं।

49 जिलों में सामान्य से कम बारिश, कुछ जिलों को ही राहत

मौसम विभाग के मुताबिक भोपाल, जबलपुर, सागर, शहडोल, रीवा और नर्मदापुरम संभाग के सभी जिलों में बारिश औसत से कम रही है। वहीं इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर और चंबल संभाग के कुछ जिलों में ही सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई है।प्रदेश के प्रमुख शहरों की स्थिति देखें तो ग्वालियर में बारिश सामान्य से करीब 7 फीसदी अधिक हुई है। इसके अलावा भोपाल में 7 फीसदी, इंदौर में 2 फीसदी, उज्जैन में 14 फीसदी और जबलपुर में 29 फीसदी तक कम बारिश दर्ज की गई है।

अगले तीन दिनों में कुछ इलाकों में भारी बारिश के संकेत

मौसम विभाग ने प्रदेश के उत्तरी हिस्से के कई जिलों में अगले तीन दिनों तक भारी बारिश की संभावना जताई है। गुरुवार को ग्वालियर, भिंड, मुरैना, दतिया, शिवपुरी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना और दमोह में तेज बारिश होने का अनुमान है।पिछले 24 घंटे में प्रदेश के कई जिलों में बारिश हुई। सीधी में सबसे ज्यादा करीब 3 इंच बारिश दर्ज की गई। इसके बाद ग्वालियर में 2.3 इंच, दतिया में 2 इंच, रीवा में 1.8 इंच, सतना में 1.2 इंच और शिवपुरी में करीब 1 इंच पानी गिरा।

मौसम सिस्टम बदलेगा तस्वीर या फिर बढ़ेगी परेशानी

मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के अनुसार प्रदेश में एक नया वेस्टर्न डिस्टरबेंस सक्रिय हुआ है, जिसका असर आने वाले दिनों में देखने को मिल सकता है। इसके चलते भोपाल, रायसेन, सीहोर, इंदौर, उज्जैन, जबलपुर, रीवा और सागर समेत कई जिलों में हल्की से तेज बारिश के आसार हैं।

बारिश के कोटे से काफी पीछे चल रहा प्रदेश

प्रदेश में अब तक औसत 16.3 इंच बारिश हुई है, जबकि इस समय तक करीब 20 इंच बारिश हो जानी चाहिए थी। यानी प्रदेश करीब 3.7 इंच बारिश से पीछे है।जून महीने में बारिश सामान्य से 14 फीसदी कम रही, जबकि जुलाई में भी करीब 13 फीसदी की कमी दर्ज की गई। जुलाई की शुरुआत में अच्छी बारिश हुई थी, लेकिन इसके बाद मानसून दो बार कमजोर पड़ गया, जिससे बारिश का आंकड़ा लगातार नीचे चला गया।

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