

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने रावतपुरा संस्थान के चेयरमैन और कथावाचक रावतपुरा सरकार (रवि शंकर महाराज) से जुड़े चर्चित फोन टैपिंग मामले में अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की ओर से की गई फोन टैपिंग कार्रवाई को अवैध करार देते हुए उससे जुड़ी सभी ऑडियो रिकॉर्डिंग और इलेक्ट्रॉनिक सामग्री को नष्ट करने का आदेश दिया है।
हालांकि, हाईकोर्ट ने सीबीआई की एफआईआर और चार्जशीट को रद्द करने से इनकार कर दिया है। अदालत ने साफ किया कि अब मामले की सुनवाई फोन टैपिंग से मिले साक्ष्यों के बिना होगी और जांच एजेंसी को अन्य वैध प्रमाणों के आधार पर अपना पक्ष रखना होगा।
फोन निगरानी की प्रक्रिया पर कोर्ट ने जताई आपत्ति
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए फोन टैपिंग की पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठाए।
कोर्ट ने कहा कि फोन टैपिंग जैसे संवेदनशील कदम के लिए कानून में तय प्रक्रिया का पूरी तरह पालन जरूरी है। सुनवाई के दौरान अदालत ने इस बात पर भी आपत्ति जताई कि जब फोन टैपिंग का आदेश 28 जून 2025 को जारी किया गया था, तो इसे 1 जून 2025 से प्रभावी मानने की अनुमति कैसे दी जा सकती है।
निजता के अधिकार में सीधा हस्तक्षेप माना
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि किसी व्यक्ति के फोन की निगरानी उसके निजता के मौलिक अधिकार से जुड़ा गंभीर मामला है। इसलिए ऐसी कार्रवाई तभी वैध हो सकती है, जब कानून में तय सभी शर्तें पूरी की जाएं।
अदालत ने कहा कि फोन टैपिंग के आदेश में सार्वजनिक आपातस्थिति या जनसुरक्षा जैसी आवश्यक परिस्थितियों का स्पष्ट उल्लेख नहीं था, जबकि कानून के अनुसार ऐसी निगरानी के लिए इन आधारों का होना जरूरी है।
सीबीआई के तीनों आदेश किए गए निरस्त
हाईकोर्ट ने सीबीआई के 28 जून 2025 के फोन टैपिंग आदेश, गृह मंत्रालय की ओर से 4 जुलाई 2025 को दी गई मंजूरी और 15 सितंबर 2025 को रिव्यू कमेटी की कार्यवाही को भी रद्द कर दिया।
इसके साथ ही फोन टैपिंग के जरिए जुटाए गए सभी ऑडियो रिकॉर्ड और इलेक्ट्रॉनिक सामग्री को नष्ट करने के निर्देश दिए गए।
एफआईआर और चार्जशीट पर कार्रवाई रहेगी जारी
अदालत ने स्पष्ट किया कि फोन टैपिंग अवैध घोषित होने से पूरा आपराधिक मामला खत्म नहीं होगा। सीबीआई की एफआईआर और चार्जशीट को बरकरार रखा गया है।
अब जांच एजेंसी दस्तावेजों, गवाहों और अन्य कानूनी रूप से स्वीकार्य साक्ष्यों के आधार पर मामले को आगे बढ़ा सकेगी।
मेडिकल कॉलेजों से जुड़े मामले में आया फैसला
गौरतलब है कि 30 जून 2025 को सीबीआई ने देशभर के 35 मेडिकल संस्थानों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। आरोप था कि स्वास्थ्य मंत्रालय और राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) के कुछ अधिकारियों की कथित मिलीभगत से मेडिकल कॉलेजों के निरीक्षण में रिश्वत, फर्जी मरीज और घोस्ट फैकल्टी जैसी अनियमितताओं का सहारा लिया गया।
इस मामले में श्री रावतपुरा सरकार इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, रायपुर के चेयरमैन होने के कारण रावतपुरा सरकार को भी आरोपी बनाया गया था। फोन टैपिंग को चुनौती देते हुए उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।
हाईकोर्ट का यह फैसला निजता के अधिकार और जांच एजेंसियों की कानूनी प्रक्रिया के पालन को लेकर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब इस मामले की आगे की सुनवाई केवल वैध साक्ष्यों के आधार पर होगी।











