

मुंबई। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी से जुड़े कथित आपत्तिजनक और भ्रामक सोशल मीडिया कंटेंट पर बॉम्बे हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को निर्देश दिया है कि मंत्री और उनके परिवार की प्रतिष्ठा को प्रभावित करने वाली पोस्ट, वीडियो और एआई से तैयार किए गए डीपफेक कंटेंट को तत्काल हटाया जाए।
याचिका में लगाए गए थे गंभीर आरोप
नितिन गडकरी ने हाई कोर्ट में दायर अपनी याचिका में कहा था कि विभिन्न सोशल मीडिया मंचों पर उनके और उनके परिवार के बारे में झूठे और भ्रामक दावे प्रसारित किए जा रहे हैं। याचिका में यह भी कहा गया कि ई20 नीति को लेकर उन्हें गलत तरीके से विवादों से जोड़ा जा रहा है और उनकी छवि खराब करने के उद्देश्य से डीपफेक वीडियो भी साझा किए जा रहे हैं।
अदालत ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर कही अहम बात
मामले की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाने या झूठी जानकारी फैलाने की अनुमति नहीं देता। अदालत ने संबंधित कंपनियों से कहा कि इस प्रकार की आपत्तिजनक सामग्री को बिना देरी हटाया जाए और भविष्य में भी ऐसे कंटेंट के प्रसार पर प्रभावी निगरानी रखी जाए।
ई20 नीति को लेकर दावों को बताया निराधार
याचिका में गडकरी ने यह भी कहा कि ई20 नीति से जुड़ी कई बातें सोशल मीडिया पर गलत तरीके से प्रस्तुत की जा रही हैं। उनके अनुसार उन्हें जानबूझकर ऐसे दावों से जोड़ा गया, जिससे लोगों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हुई। उन्होंने अदालत से इस तरह के फर्जी और भ्रामक प्रचार पर रोक लगाने की मांग की थी।
अंतरिम राहत देते हुए जारी किए निर्देश
मामले की गंभीरता को देखते हुए बॉम्बे हाई कोर्ट ने गडकरी को अंतरिम राहत प्रदान की है। अदालत ने संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को निर्देश दिया कि आदेश का पालन करते हुए सभी मानहानिकारक पोस्ट, वीडियो और अन्य आपत्तिजनक सामग्री को शीघ्र हटाया जाए।











