अंबिकापुर: राजीव गांधी शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, अंबिकापुर में मंगलवार को छात्र-छात्राओं ने यौन उत्पीड़न रोकथाम एवं पॉश (POSH) अधिनियम को लेकर जागरूकता अभियान चलाया। सोशल इनोवेशन एवं कम्युनिटी इंगेजमेंट सेल, विशाखा समिति तथा मुहिम फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने सुरक्षित एवं समावेशी शैक्षणिक वातावरण के प्रति जागरूकता फैलाने का संदेश दिया।

कार्यक्रम का नेतृत्व महाविद्यालय के पांच विद्यार्थियों अंकिता, प्रीति, भूमिका, आशुतोष और अंबिके ने किया। इस दौरान छात्राओं के बीच किए गए सर्वेक्षण के निष्कर्ष साझा किए गए, जिनमें परिसर के उन स्थानों की पहचान की गई जहां सुरक्षा व्यवस्था को और बेहतर बनाने की आवश्यकता महसूस की गई। जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से प्रश्नोत्तरी (क्विज़) सहित विभिन्न सहभागितापूर्ण गतिविधियों का आयोजन भी किया गया। कार्यक्रम में लगभग 150 विद्यार्थियों ने भाग लिया, जिनमें राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) के कैडेट भी बड़ी संख्या में शामिल रहे।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. अनिल कुमार सिन्हा ने विद्यार्थियों की पहल की सराहना करते हुए कहा कि शिक्षा केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि विद्यार्थियों को सामाजिक सरोकारों और जिम्मेदारियों के प्रति भी संवेदनशील बनना चाहिए। उन्होंने ऐसे कार्यक्रमों को व्यक्तित्व विकास और सामाजिक जागरूकता की दिशा में महत्वपूर्ण बताया।

विशाखा समिति की संयोजक डॉ. संगीता पाण्डेय एवं सोशल इनोवेशन एवं कम्युनिटी इंगेजमेंट सेल के संयोजक डॉ. दीपक सिंह ने भी विद्यार्थियों को संबोधित किया। विधि विभाग की डॉ. पूनम ने तकनीकी सत्र में पॉश अधिनियम, विद्यार्थियों के अधिकारों तथा यौन उत्पीड़न से संबंधित शिकायतों के निवारण की कानूनी प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी दी। कार्यक्रम के अंत में डॉ. कामिनी ने आभार व्यक्त किया।

इस अवसर पर वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. एस.एन. पाण्डेय, आईक्यूएसी संयोजक डॉ. उमेश कुमार पांडेय, डॉ. माधवेन्द्र तिवारी, डॉ. रजनी सारथी, डॉ. अनुजा कुजूर सहित मुहिम फाउंडेशन के आकृति, रोस एवं ऋषिकेश उपस्थित रहे। आयोजन में शामिल पांचों विद्यार्थी महाविद्यालय एवं मुहिम फाउंडेशन द्वारा संयुक्त रूप से संचालित यूथ लीडरशिप एंड कम्युनिटी एक्शन' प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम के विद्यार्थी हैं। कार्यक्रम के माध्यम से परिसर को सुरक्षित, जागरूक और समावेशी बनाने की सामूहिक प्रतिबद्धता का संदेश दिया गया।

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