

जशपुर: छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले के बहुचर्चित संतोष भगत हत्याकांड में गुरुवार को अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया। अपने ही पति की नृशंस हत्या कर शव को ट्रॉली सूटकेस में छिपाने वाली पत्नी मंगरीता भगत (45) को द्वितीय अपर सत्र न्यायालय, कुनकुरी ने सश्रम आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने आरोपी को हत्या और साक्ष्य मिटाने का दोषी ठहराते हुए कहा कि ऐसे जघन्य अपराध में किसी भी प्रकार की नरमी न्याय और समाज, दोनों के हित में स्वीकार्य नहीं हो सकती।
क्या था पूरा मामला?
पुलिस के मुताबिक 7 नवंबर 2025 की रात थाना दुलदुला क्षेत्र के ग्राम भिंजपुर में पति-पत्नी के बीच घरेलू विवाद हुआ था। इसी दौरान मंगरीता भगत ने रसोई में रखे सील-पत्थर से पति संतोष भगत के सिर और कान के पास कई वार किए। गंभीर चोटों के कारण संतोष भगत की मौके पर ही मौत हो गई।हत्या के बाद आरोपी ने घर में फैले खून के निशानों को साफ किया और शव को मोड़कर एक बड़े ट्रॉली सूटकेस में ठूंस दिया, ताकि किसी को वारदात की भनक न लगे और साक्ष्य भी मिट जाएं।
दो दिन बाद बेटी ने खोला राज
घटना का खुलासा 9 नवंबर 2025 को हुआ, जब मृतक की बेटी और अन्य परिजन घर पहुंचे। ताला खोलने के बाद उन्हें घर में रखा ट्रॉली सूटकेस संदिग्ध लगा। सूटकेस खोलते ही अंदर संतोष भगत का शव मिला। इस सनसनीखेज वारदात की सूचना मिलते ही थाना दुलदुला पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की।
वैज्ञानिक जांच बनी सबसे बड़ा सबूत
मामले की विवेचना निरीक्षक कृष्ण कुमार साहू ने की। जांच के दौरान ई-साक्ष्य ऐप के माध्यम से डिजिटल साक्ष्य एकत्र किए गए। पोस्टमार्टम रिपोर्ट, एफएसएल रिपोर्ट, चिकित्सकीय अभिमत, जब्ती, मेमोरेंडम और अन्य परिस्थितिजन्य साक्ष्यों ने आरोपी के खिलाफ मजबूत केस तैयार किया।एफएसएल जांच में हत्या में प्रयुक्त सील-पत्थर, ट्रॉली सूटकेस, आरोपी के कपड़ों और अन्य जब्त वस्तुओं पर मानव रक्त मिलने की पुष्टि हुई, जिसने अभियोजन पक्ष के दावों को और मजबूत कर दिया।
अदालत में अपर लोक अभियोजक पुष्पा सिंह ने साक्ष्यों की मजबूत श्रृंखला पेश करते हुए साबित किया कि हत्या आरोपी ने ही की थी। अभियोजन के तर्कों से सहमत होते हुए द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश बलराम कुमार देवांगन ने आरोपी को दोषी करार दिया।फैसला सुनाते हुए अदालत ने कहा कि अपने ही पति की हत्या कर शव को सूटकेस में छिपाना केवल एक अपराध नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक मूल्यों पर गंभीर प्रहार है। ऐसे अपराध में किसी भी तरह की नरमी नहीं बरती जा सकती।कोर्ट ने बीएनएस धारा 103(1) सश्रम आजीवन कारावास और 1,000 का अर्थदंड, बीएनएस धारा 238(क) 3 वर्ष का सश्रम कारावास और ₹500 का अर्थदंड की सजा सुनाई है।
जशपुर पुलिस ने कहा कि गंभीर अपराधों की निष्पक्ष, वैज्ञानिक और प्रभावी विवेचना कर दोषियों को न्यायालय से कठोर सजा दिलाना उसकी प्राथमिकता है।










