

छत्तीसगढ़ : हाई कोर्ट ने पहली पत्नी के जीवित रहते दूसरी शादी के आरोप में बर्खास्त किए गए छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल (सीएएफ) के एक आरक्षक की याचिका पर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने विभागीय अपीलीय प्राधिकारी का आदेश रद्द करते हुए मामले को दोबारा सुनवाई के लिए वापस भेज दिया और निर्देश दिया कि 60 दिनों के भीतर नियमों के अनुरूप नया निर्णय लिया जाए।
सुनवाई का पूरा अवसर देने का निर्देश
जस्टिस संजय के. अग्रवाल की एकल पीठ ने कहा कि अपीलीय प्राधिकारी को याचिकाकर्ता का पक्ष पूरी तरह सुनना होगा और छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1966 के नियम 27(2) के अनुसार प्रत्येक महत्वपूर्ण बिंदु पर विचार करते हुए कारणयुक्त आदेश पारित करना होगा।
क्या है पूरा मामला
जशपुर जिले के रहने वाले जार्ज केरकेट्टा 12वीं वाहिनी सीएएफ, रामानुजगंज में आरक्षक के पद पर कार्यरत थे। विभागीय जांच में उन पर पहली पत्नी के रहते दूसरा विवाह करने का आरोप सही पाया गया। इसे छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियम 22(1) का उल्लंघन मानते हुए 29 सितंबर 2014 को उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। बाद में उनकी विभागीय अपील भी 2 जनवरी 2016 को खारिज कर दी गई।
हाई कोर्ट में दी थी चुनौती
आरक्षक ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर दावा किया कि विभागीय जांच के दौरान उन्हें अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर नहीं मिला। साथ ही अपीलीय प्राधिकारी ने उनकी दलीलों पर विचार किए बिना औपचारिक रूप से अपील खारिज कर दी, जबकि आदेश में किसी भी निष्कर्ष का स्पष्ट आधार नहीं बताया गया।
सरकार ने बर्खास्तगी को बताया वैध
राज्य सरकार की ओर से अदालत में कहा गया कि विभागीय जांच पूरी तरह नियमों के अनुसार हुई थी और पहली पत्नी के रहते दूसरा विवाह करने का आरोप सिद्ध होने के कारण बर्खास्तगी का फैसला उचित और वैधानिक था।
हाई कोर्ट ने बताई अपीलीय प्रक्रिया की कमी
सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि अपीलीय प्राधिकारी ने यह नहीं बताया कि विभागीय जांच विधिसम्मत थी या नहीं, उपलब्ध साक्ष्य पर्याप्त थे या नहीं और दी गई सजा परिस्थितियों के अनुरूप थी या अत्यधिक। कोर्ट ने कहा कि बिना कारण दर्ज किए पारित किया गया ऐसा आदेश न्यायिक समीक्षा में टिक नहीं सकता। इसी आधार पर अपीलीय आदेश रद्द करते हुए मामले की नए सिरे से सुनवाई के निर्देश दिए गए।











