

पुलिस महानिरीक्षक सरगुजा रेंज द्वारा रेंज के समस्त डीएसपी (अजाक) की समीक्षा बैठक आयोजित
जाति प्रमाण-पत्र के अभाव में लंबित प्रकरणों का संबंधित विभागों से समन्वय कर शीघ्र निराकरण के निर्देश
कम दोषसिद्धि दर पर जताई चिंता, विवेचना एवं अभियोजन की गुणवता सुधारने पर विशेष जोर
अंबिकापुर। पुलिस महानिरीक्षक सरगुजा रेंज द्वारा आज रेंज अंतर्गत जिलों के समस्त उप पुलिस अधीक्षक (अजाक) की समीक्षा बैठक आयोजित कर अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के अंतर्गत पंजीबद्ध प्रकरणों, पीड़ितों को प्रदाय की जाने वाली राहत/मुआवजा राशि तथा न्यायालयीन प्रकरणों में दोषसिद्धि की स्थिति की विस्तृत समीक्षा की गई।
समीक्षा पर वर्ष 2024 में 224 प्रकरण दर्ज हुए अपराध दर्ज होने के पश्चात् 187 प्रकरण में राहत राशि का प्रथम किस्त प्राप्त हुआ। वर्ष 2025 में 319 प्रकरण दर्ज हुए अपराध दर्ज होने के पश्चात् 228 प्रकरण में राहत राशि का प्रथम किस्त प्राप्त हुआ तथा वर्ष 2026 में 140 प्रकरण दर्ज हुए अपराध दर्ज होने के पश्चात् 54 प्रकरण में राहत राशि का प्रथम किस्त प्राप्त हुआ। इसी प्रकार माननीय न्यायालय में चालान प्रस्तुत करने के बाद एवं दोषसिद्धि पश्चात् पीड़ित पक्ष को मिलने वाले द्वितीय एवं तृतीय किस्त के लंबित रहने के संबंध में शीघ्र निराकरण हेतु निर्देशित किया गया।
बैठक में विशेष रूप से यह पाया गया कि, अनेक प्रकरणों में जाति प्रमाण-पत्र उपलब्ध नहीं होने अथवा जिला स्तरीय समितियों के स्तर पर प्रकरण लंबित रहने के कारण पीड़ितों को नियमानुसार मिलने वाली राहत राशि के भुगतान में विलंब हो रहा है। पुलिस महानिरीक्षक द्वारा निर्देशित किया गया कि ऐसे सभी लंबित प्रकरणों की प्रकरणवार समीक्षा की जाए तथा जिला प्रशासन, आदिम जाति कल्याण विभाग एवं संबंधित सक्षम अधिकारियों से प्रभावी समन्वय स्थापित कर आवश्यक जाति प्रमाण-पत्र एवं अन्य दस्तावेज शीघ्र उपलब्ध कराए जाएं। किसी भी पात्र पीडित को प्रक्रियागत अथवा समन्वय की कमी के कारण राहत राशि के लिए अनावश्यक प्रतीक्षा न करनी पड़े।

बैठक में अनुसूचित जाति/जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के प्रकरणों में अपेक्षाकृत कम दोषसिद्धि दर पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की गई। पुलिस महानिरीक्षक ने निर्देश दिए कि दोषमुक्त हुए प्रकरणों का गहन विश्लेषण कर दोषमुक्ति के वास्तविक कारणों-विवेचना में कमी, साक्ष्य संकलन की त्रुटि, गवाहों का पक्षद्रोही होना, चिकित्सकीय अथवा वैज्ञानिक साक्ष्य की कमी तथा अभियोजन स्तर की कमियों की पहचान की जाए। उन्होंने कहा कि इन प्रकरणों की विवेचना केवल समय-सीमा में पूर्ण करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि विवेचना की गुणवता सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
न्यायालय में विचाराधीन महत्वपूर्ण प्रकरणों की नियमित मॉनिटरिंग करने, गवाहों की समय पर उपस्थिति सुनिश्चित करने तथा प्रत्येक दोषमुक्ति प्रकरण की समीक्षा कर उससे प्राप्त निष्कर्षों को भविष्य की विवेचना में लागू करने के निर्देश भी दिए गए।
पुलिस महानिरीक्षक ने सभी डीएसपी (अजाक) को निर्देशित किया कि वे अपने-अपने जिलो में लंबित राहत राशि. जाति प्रमाण-पत्र संबंधी लंबित प्रकरणों तथा न्यायालयीन प्रकरणों की नियमित समीक्षा करे और यह सुनिश्चित करें कि अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के पीड़ितों को त्वरित राहत, गुणवत्तापूर्ण विवेचना एवं प्रभावी न्याय प्राप्त हो।
समीक्षा बैठक के दौरान डीएसपी आजाक सरगुजा सुरेश भगत डीएसपी आजाक सुरजपुर रीना नीलम कुजूर डीएसपी आजाक एमसीबी तर्सिल्ला टोप्पो, डीएसपी आजाक कोरिया नेल्सन कुजूर, डीएसपी आजाक बलरामपुर कमलेश्वर भगत उपस्थिति रहे एवं डीएसपी आजाक जशपुर भावेश समरथ, वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से जुड़े रहे।










