

रायपुर: छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र में प्रदेश के गांवों के सर्वेक्षण और बंदोबस्त की स्थिति को लेकर सवाल उठे। कांग्रेस विधायक जनक ध्रुव ने राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा से इस संबंध में जानकारी मांगी और पूछा कि लंबे समय से जिन गांवों का बंदोबस्त नहीं हुआ है, इसके लिए जिम्मेदारी किसकी है।
हर 30 साल में होना चाहिए गांवों का सर्वे
विधायक के सवाल का जवाब देते हुए राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा ने सदन में बताया कि छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता के अनुसार सामान्य रूप से प्रत्येक गांव का सर्वेक्षण और भू-राजस्व निर्धारण 30 वर्ष के अंतराल में किया जाना चाहिए।उन्होंने बताया कि राज्य में कुल 20,551 राजस्व ग्राम हैं। इनमें से 19,805 गांवों का सर्वेक्षण पूरा हो चुका है, जबकि 746 गांव अभी भी असर्वेक्षित हैं।
371 गांवों में प्रक्रिया जारी, 375 गांवों में काम बाकी
राजस्व मंत्री ने सदन को जानकारी दी कि असर्वेक्षित 746 गांवों में से 371 गांवों में सर्वेक्षण की प्रक्रिया चल रही है। वहीं 375 गांव ऐसे हैं, जहां अभी तक सर्वेक्षण शुरू नहीं किया जा सका है।
उन्होंने कहा कि सर्वेक्षण का कार्य उपलब्ध वित्तीय संसाधनों, स्वीकृत योजनाओं और तकनीकी सुविधाओं के आधार पर चरणबद्ध तरीके से किया जाता है।
सर्वे नहीं होने के लिए किसी को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता
मंत्री टंक राम वर्मा ने स्पष्ट किया कि जिन गांवों में अभी तक सर्वेक्षण पूरा नहीं हुआ है, उसके लिए किसी व्यक्ति या अधिकारी को सीधे तौर पर जिम्मेदार नहीं माना जा सकता। उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया संसाधनों और निर्धारित योजनाओं के अनुसार आगे बढ़ती है।उन्होंने यह भी बताया कि बाकी बचे गांवों का सर्वेक्षण कब तक पूरा होगा, इसकी निश्चित समय सीमा अभी तय नहीं की जा सकती, क्योंकि यह उपलब्ध संसाधनों और कार्ययोजना पर निर्भर करता है।











