

यूपी: उत्तर प्रदेश के आगरा की एक अदालत ने एक शख्स को 3 साल जेल की सजा सुनाई है। आरोपी ने करीब 27 साल पहले पुलिस भर्ती के दौरान एक फर्जी हलफनामा जमा करके नौकरी हासिल की थी। अदालत ने उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले के सिथरपुर गांव के रहने वाले भोजराज को धोखाधड़ी और प्रादेशिक आर्म्ड कांस्टेबुलरी में नौकरी पाने के लिए जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल करने का दोषी पाया। जेल की सजा के साथ-साथ कोर्ट ने उस पर 3,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना न भरने पर उसे अतिरिक्त जेल की सजा काटनी पड़ेगी।
क्या है मामला?
यह मामला 1998-99 का बताया जा रहा है और अंतिम फैसले तक पहुंचने में इसे न्यायिक प्रणाली में ढाई दशक से अधिक का समय लग गया। अभियोजन पक्ष के अनुसार, भोजराज ने 1999 में पीएससी (PAC) में कांस्टेबल के पद के लिए आवेदन करते समय एक झूठा हलफनामा जमा किया था। दस्तावेजों के वेरिफिकेशन के दौरान अधिकारियों को गड़बड़ी का पता चला, जिसके बाद जांच शुरू की गई।
कब दर्ज हुई FIR?
तत्कालीन क्लर्क प्रदीप कुमार वर्मा की शिकायत के आधार पर, 1 जनवरी 1999 को आगरा के ताजगंज थाने में भोजराज के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी का मामला दर्ज किया गया था। पुलिस ने जांच पूरी कर 31 मई 1999 को अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी थी।
कोर्ट ने माना दोषी
इस मामले की सुनवाई विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट शिवानंद गुप्ता की अदालत में हुई। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अपने दावों के समर्थन में गवाहों के बयान और दस्तावेजी सबूत पेश किए। दोनो पक्षों की दलीलें और सबूतों को देखने के बाद, अदालत ने भोजराज को धोखाधड़ी के जरिए सरकारी नौकरी पाने का दोषी माना और सजा का ऐलान किया।
गलत हलफनामा दिया था
अभियोजन अधिकारी राजेश कुमार ने बताया, "आरोपी ने भर्ती प्रक्रिया के दौरान गलत हलफनामा दिया था। कोर्ट की कार्यवाही के दौरान वह हलफनामा झूठा पाया गया, जिसके आधार पर कोर्ट ने यह सजा सुनाई है।" इस फैसले के साथ ही 90 के दशक के उत्तर दशक से चले आ रहे भर्ती फर्जीवाड़े के एक लंबे कानूनी मामले का आखिरकार अंत हो गया है।










