

एम्बुलेंस से लेकर स्कूली बच्चों तक सभी इस सड़क से गुजरने को मजबूर हैं। क्या इस सड़क को विकास का रास्ता मानेगा या इसे यूं ही मौत के गड्ढों में तब्दील रहने देगा?"
सूरजपुर/ दीपेश कुशवाहा: सूरजपुर-रामनगर मार्ग पर सरस्वतीपुर क्षेत्र की लगभग 2.5 किलोमीटर लंबी सड़क इन दिनों लोगों के लिए बड़ी मुसीबत बन गई है। प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत बनी यह सड़क पूरी तरह जर्जर हो चुकी है। सड़क पर जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं, जिनमें बारिश के दौरान पानी भर जाने से हालात और भी खराब हो जाते हैं। कीचड़ और जलभराव के कारण वाहन चालकों को सड़क पर चलना किसी खतरे से कम नहीं लगता, वहीं बारिश खत्म होने के बाद यही सड़क धूल के गुबार से लोगों का जीना मुश्किल कर देती है।

यह सड़क केवल एक गांव या क्षेत्र की जरूरत नहीं है, बल्कि दर्जनों गांवों को जिला मुख्यालय और अन्य क्षेत्रों से जोड़ने वाली महत्वपूर्ण जीवनरेखा है। प्रतिदिन हजारों लोग इस मार्ग से आवागमन करते हैं। स्कूल और कॉलेज जाने वाले छात्र-छात्राओं को रोजाना इसी बदहाल सड़क से गुजरना पड़ता है। कई बार गड्ढों और फिसलन के कारण छात्र-छात्राएं गिरकर चोटिल भी हो चुके हैं।

सबसे गंभीर स्थिति तब बनती है जब किसी मरीज को अस्पताल पहुंचाने के लिए एम्बुलेंस इसी सड़क से गुजरती है। गड्ढों और कीचड़ से भरी सड़क पर एम्बुलेंस की रफ्तार धीमी हो जाती है, जिससे गंभीर मरीजों की जान तक खतरे में पड़ सकती है। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाने में काफी परेशानी होती है।
किसान, कर्मचारी, व्यापारी और आम नागरिक भी रोजाना इस सड़क की बदहाली का खामियाजा भुगत रहे हैं। बड़ी गाड़ियां और मालवाहक वाहन गड्ढों में फंस जाते हैं, जिससे घंटों जाम की स्थिति बन जाती है। बरसात में कीचड़ और गर्मी के दिनों में उड़ती धूल लोगों के लिए परेशानी का कारण बन चुकी है।

ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क की खराब स्थिति को लेकर कई बार जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। क्षेत्र के विधायक और प्रशासनिक अधिकारियों का ध्यान इस गंभीर समस्या की ओर नहीं जा रहा है, जबकि यह मुद्दा सीधे हजारों लोगों के जीवन और सुरक्षा से जुड़ा हुआ है। स्थानीय लोगों का कहना है कि चुनाव के समय विकास के बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं की ओर ध्यान नहीं दिया जाता।

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और कलेक्टर से मांग की है कि संबंधित विभाग को तत्काल मौके का निरीक्षण करने के निर्देश दिए जाएं और सड़क के गड्ढों की मरम्मत जल्द से जल्द कराई जाए। साथ ही सड़क की अत्यधिक खराब स्थिति को देखते हुए इस 2.5 किलोमीटर लंबे मार्ग का पूर्ण पुनर्निर्माण या नई सड़क निर्माण की स्वीकृति दी जाए।
लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इस सड़क का निर्माण नहीं कराया गया तो किसी बड़े हादसे से इंकार नहीं किया जा सकता। अब देखना होगा कि प्रशासन और जनप्रतिनिधि इस जनसमस्या को कितनी गंभीरता से लेते हैं और हजारों लोगों को राहत दिलाने के लिए कब तक ठोस कदम उठाते हैं।











