रायपुर: भारतीय लोक कला की महान हस्ती और पंडवानी गायन को वैश्विक पहचान दिलाने वाली पद्म विभूषण सम्मानित तीजन बाई का शनिवार देर रात निधन हो गया। वह 70 वर्ष की थीं और लंबे समय से अस्वस्थ चल रही थीं। उनका उपचार रायपुर स्थित एम्स में जारी था, जहां उन्होंने रात करीब 3:15 बजे अंतिम सांस ली।

अस्पताल से मिली जानकारी के अनुसार, शनिवार देर रात उनकी तबीयत अचानक अधिक बिगड़ गई। चिकित्सकों ने उन्हें बचाने का हरसंभव प्रयास किया, लेकिन आखिरकार उन्होंने दम तोड़ दिया। उनके निधन की खबर मिलते ही कला, साहित्य और सांस्कृतिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई।तीजन बाई ने अपनी अनूठी प्रस्तुति शैली और सशक्त आवाज के माध्यम से छत्तीसगढ़ की पारंपरिक पंडवानी लोकगाथा को देश ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचाया। दशकों तक उन्होंने भारतीय लोक संस्कृति के संरक्षण और प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

लोक कला के क्षेत्र में उनके अतुलनीय योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री, पद्म भूषण और देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से सम्मानित किया था। उनकी कला, समर्पण और विरासत आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी।

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