

अम्बिकेश गुप्ता
कुसमी। बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के विकासखंड कुसमी अंतर्गत ग्राम पंचायत अमटाही के वार्ड क्रमांक एक दर्रीपारा में सोमवार की शाम लगभग पांच बजे तेज बारिश के दौरान आकाशीय बिजली गिरने से एक गरीब परिवार का कच्चा मकान क्षतिग्रस्त हो गया। यह क्षेत्र बॉक्साइट प्रभावित इलाकों में शामिल है, जहां अधिकांश ग्रामीण प्राकृतिक चुनौतियों और सीमित संसाधनों के बीच जीवन यापन करते हैं। घटना के समय घर में मौजूद परिवार के सात सदस्य आकाशीय बिजली के तेज प्रभाव की चपेट में आ गए। हालांकि सभी की जान बच गई, लेकिन मकान में गंभीर दरारें पड़ गईं और घरेलू सामान क्षतिग्रस्त हो गया।
जानकारी के अनुसार, दर्रीपारा निवासी नान्हू सोनवानी के घर के समीप स्थित एक विशाल शाल वृक्ष को छूते हुवे अकाशिय बिजली सीधे मिट्टी एवं ईंट से बने मकान तक पहुंच गया। तेज झटके से मकान की दीवारों में कई स्थानों पर बड़ी-बड़ी दरारें पड़ गईं। घर में रखी आलमारी, दीवार घड़ी सहित अन्य घरेलू उपयोग की सामग्री भी क्षतिग्रस्त हो गई।
घटना के समय घर में नान्हू सोनवानी, पैरी सोनवानी, फूलवंती सोनवानी, अनिकेत सोनवानी, प्रियांशु सोनवानी, अमरदीप सोनवानी एवं रोशनी सोनवानी मौजूद थे। वहीं नान्हू सोनवानी के पुत्र जीतू सोनवानी गांव में ही कुछ दूरी पर ट्रैक्टर चला रहे थे। बारिश कुछ कम होने के बाद वे लगभग 5 से 10 मिनट में घर पहुंचे। घर की स्थिति देखकर उन्होंने तत्काल सभी परिजनों को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सामरी पहुंचाया, जहां चिकित्सकों द्वारा सभी का प्राथमिक उपचार किया गया। राहत की बात यह रही कि सभी की हालत सामान्य है और किसी को गंभीर चोट नहीं आई।
ग्रामीणों ने बताया कि बिजली का प्रहार इतना तेज था कि आसपास के लोग भी घबरा गए। यदि आकाशीय बिजली सीधे मकान पर गिरती तो बड़ा हादसा हो सकता था। घटना के बाद पूरा परिवार दहशत में है और क्षतिग्रस्त मकान में रहने को मजबूर है। आर्थिक रूप से कमजोर इस परिवार के सामने अब मकान की मरम्मत और घरेलू सामान की व्यवस्था करना बड़ी चुनौती बन गया है।
अमटाही सहित आसपास का क्षेत्र बॉक्साइट प्रभावित क्षेत्र के रूप में जाना जाता है। यहां कई गांव दूरस्थ एवं वनांचल क्षेत्र में स्थित हैं, जहां प्राकृतिक आपदाओं के दौरान राहत एवं बचाव संसाधन सीमित रहते हैं। ऐसे क्षेत्रों में आपदा पूर्व तैयारी और सुरक्षा उपायों को और मजबूत करने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
तड़ित चालक लगाने की उठी मांग..
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि गांवों में बार-बार आकाशीय बिजली गिरने की घटनाएं सामने आती रहती हैं। इसके बावजूद अधिकांश मकानों, स्कूलों, आंगनबाड़ी केंद्रों, पंचायत भवनों एवं अन्य सार्वजनिक भवनों में तड़ित चालक की व्यवस्था नहीं है। जानकारों के अनुसार तड़ित चालक भवन पर गिरने वाली आकाशीय बिजली को सुरक्षित रूप से जमीन तक पहुंचा देता है, जिससे भवन एवं उसमें रहने वाले लोगों की सुरक्षा काफी हद तक सुनिश्चित हो सकती है। ग्रामीणों ने बॉक्साइट प्रभावित एवं संवेदनशील क्षेत्रों में प्राथमिकता के आधार पर तड़ित चालक लगाने की मांग की है।
मौसम विभाग की चेतावनी पर भी ध्यान देना जरूरी..
भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) समय-समय पर आकाशीय बिजली, गरज-चमक और भारी बारिश को लेकर पूर्व चेतावनी जारी करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी स्थिति में लोगों को खुले मैदान, ऊंचे पेड़ों, बिजली के खंभों तथा जलाशयों के आसपास जाने से बचना चाहिए। खराब मौसम के दौरान सुरक्षित भवन के भीतर रहना ही सबसे सुरक्षित उपाय माना जाता है। ग्रामीण क्षेत्रों में मौसम संबंधी चेतावनियों की जानकारी अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने की आवश्यकता है।
राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग से सहायता की मांग..
प्राकृतिक आपदाओं से होने वाली क्षति का आकलन कर प्रभावित परिवारों को राहत उपलब्ध कराने का दायित्व जिला प्रशासन, राजस्व विभाग एवं राज्य आपदा प्रबंधन तंत्र का होता है। पीड़ित परिवार ने मीडिया के माध्यम से शासन-प्रशासन से मांग की है कि घटना का तत्काल सर्वे कराया जाए, क्षतिग्रस्त मकान एवं घरेलू सामान का मूल्यांकन कर नियमानुसार आर्थिक सहायता एवं राहत राशि शीघ्र प्रदान की जाए।
स्थानीय लोगो ने भी जिला प्रशासन से अपील की है कि बॉक्साइट प्रभावित एवं आकाशीय बिजली की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष अभियान चलाकर तड़ित चालक लगाए जाएं, लोगों को मौसम विभाग की चेतावनियों के प्रति जागरूक किया जाए तथा प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित परिवारों को त्वरित राहत उपलब्ध कराई जाए, ताकि भविष्य में जन-धन की हानि को कम किया जा सके।











