महासमुंद। छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले से सरकारी रिकॉर्ड में बड़ी लापरवाही का मामला सामने आया है। बागबाहरा विकासखंड के ग्राम बाघामुड़ा निवासी बुजुर्ग किसान जीवनलाल साहू को सरकारी दस्तावेजों में मृत दर्ज कर दिया गया, जबकि वे पूरी तरह जीवित हैं। इस गंभीर त्रुटि के कारण उन्हें खेती के लिए खाद नहीं मिल पा रही है और कई सरकारी योजनाओं का लाभ भी रुक गया है।

खाद लेने पहुंचे तो खुली हैरान करने वाली सच्चाई

मामले का खुलासा तब हुआ जब जीवनलाल साहू खेती के लिए खाद लेने स्थानीय सहकारी समिति पहुंचे। आधार सत्यापन के दौरान सिस्टम में उनका आधार निष्क्रिय दिखा। स्क्रीन पर यह जानकारी सामने आई कि उन्हें मृत घोषित किए जाने के कारण आधार कार्ड निष्क्रिय कर दिया गया है। इसके चलते समिति ने उन्हें खाद देने से मना कर दिया।

'मैं जिंदा हूं, फिर भी हर जगह साबित करना पड़ रहा'

इस घटना के बाद जीवनलाल साहू अपनी पहचान बहाल कराने के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं। उन्होंने बताया कि राशन दुकान, सहकारी समिति और कई विभागों में जाने के बावजूद उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ। हर कार्यालय उन्हें दूसरे विभाग भेज देता है। अपनी पीड़ा बताते हुए वे भावुक हो गए और कहा कि जीवित होने के बावजूद सरकारी रिकॉर्ड में उन्हें मृत बता दिया गया है, इसलिए अब उन्हें हर जगह यह साबित करना पड़ रहा है कि वे जिंदा हैं।

आधार बंद होने से योजनाओं का लाभ भी रुका

परिजनों का कहना है कि आधार निष्क्रिय होने के कारण न केवल खाद मिलने में परेशानी हो रही है, बल्कि कई सरकारी योजनाओं का लाभ भी प्रभावित हो गया है। परिवार कई दिनों से संबंधित अधिकारियों से संपर्क कर रहा है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

सरकारी व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

इस घटना ने सरकारी रिकॉर्ड प्रबंधन और प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर किस स्तर पर हुई गलती के कारण एक जीवित व्यक्ति को सरकारी रिकॉर्ड में मृत घोषित कर दिया गया। साथ ही यह भी जांच का विषय है कि बिना पर्याप्त सत्यापन के आधार कार्ड निष्क्रिय कैसे कर दिया गया।

पहचान बहाल करने की लगाई गुहार

पीड़ित किसान ने प्रशासन से जल्द से जल्द सरकारी रिकॉर्ड में अपनी पहचान बहाल करने की मांग की है, ताकि वे खेती-किसानी का कार्य जारी रख सकें और सरकारी योजनाओं का लाभ फिर से प्राप्त कर सकें। अब सभी की नजर इस बात पर है कि प्रशासन इस गंभीर मामले में कितनी तेजी से सुधारात्मक कार्रवाई करता है और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ क्या कदम उठाए जाते हैं।

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