

माह मार्च एवं अप्रैल के सेशन न्यायालय के 137 प्रकरण एवं लेवर न्यायालय के 588 कुल 725 दोषमुक्ति प्रकरणों की समीक्षा की गई
न्यायालय में विचारण के दौरान गंभीर प्रकरणों में पक्षदोही होने की स्थिति में धारा-383 बीएनएसएस के तहत की जावे कार्यवाही
अंबिकापुर/जशपुर। पुलिस महानिरीक्षक सरगुजा रेंज दीपक कुमार झा (भा.पु.से.) के द्वारा जिला जशपुर में रेंज स्तरीय दोषमुक्ति प्रकरणों की समीक्षा बैठक ली गई। दिनांक 22.06.2025 को आयोजित हुये दोषमुक्ति समीक्षा बैठक में माह मार्च एवं अप्रैल के सेशन कोर्ट के 137 प्रकरण व लोवर कोर्ट के 588 कुल 725 प्रकरणों का जिलेवार विस्तृत समीक्षा की गई। विशेष रूप से दोषमुक्ति प्रकरणों में दोषमुक्ति के कारणों की समीक्षा कर उन्हें दूर किया जावे और दोषसिद्धि के आंकडों में वृद्धि किया जावे।
समीक्षा बैठक में आईजी ने लंबित प्रकरणों की समीक्षा समय पर प्रस्तुत नहीं किए जाने पर नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि पूर्व में दिए गए निर्देशों के बावजूद कई लंबित प्रकरण समीक्षा के लिए प्रस्तुत नहीं किए गए। सभी इकाइयों को निर्देशित किया गया कि प्रत्येक माह मंगलवार को आयोजित समीक्षा बैठक में लंबित प्रकरणों की बिंदुवार समीक्षा अनिवार्य रूप से प्रस्तुत करें तथा भविष्य में इस प्रकार की लापरवाही की पुनरावृत्ति न हो।

E-prosecution के तहत जिला अभियोजन अधिकारी को प्रेषित किये जाने वाले अभियोग पत्र को कम से कम अभियोग पत्र पेश किया जाने के पर्याप्त समय पूर्व भेजा जावे जिससे प्रकरणों में दर्शित कमी/त्रुटियों को समय पर दूर किया जा सके ताकि प्रकरण न्यायालय में विचारण दौरान उक्त कमी/त्रुटि का लाभ आरोपी को प्राप्त न हो एवं प्रकरण में दोषसिद्ध हो ऐसे विषयों पर गहन चर्चा की गई।
समीक्षा दौरान यह पाया गया कि बलात्कार तथा पाक्सों एक्ट के प्रकरणों में दोषसिद्ध का प्रतिशत बहुत कम है। बलात्कार एवं पाक्सों एक्ट के प्रकरणों में लोक अभियोजक द्वारा पीड़िता के धारा-164 जा.फौ. (धारा 183 बीएनएसएस) के न्यायालयीन कथन का विचारण दौरान Exhibit अनिवार्य रूप से कराया जावे। ताकि पीड़िता यदि न्यायालय में धारा 164 जा. फौ. के कथन पश्चात् विचारण के दौरान प्रतिपरीक्षण में पक्षद्रोही कथन करती है तो उसके विरूद्ध धारा-344 दप्रसं. (धारा-383 बीएनएसएस) के तहत कार्यवाही कराया जा सके। विगत माह में माननीय न्यायालय जिला सूरजपुर के सेशन प्रकरणों में दोषसिद्धि की संख्या में वृद्धि होना पाये जाने के दौरान पुलिस महानिरीक्षक सरगुजा द्वारा उक्त कार्य हेतु समीक्षा बैठक के दौरान उमनि/वरि पुलिस अधीक्षक की सराहना की गई।
ऐसे प्रकरण जिनमें विवेचना में साक्ष्य संकलन दौरान प्रार्थी/प्रार्थिया के द्वारा झूठा मिथ्या रिपोर्ट करने या प्रथम सूचना पत्र को ताईत नहीं करने के तथ्य पाये जाने के प्रकरण में मान. न्यायालय में खारिजी स्वीकृति हेतु हर संभव प्रयास किया जावे और खारिजी स्वीकृति पश्चात् न्यायालय के समक्ष धारा-182,211 भादसं. (धारा 217,248 बीएनएस) के तहत कार्यवाही किया जावे। इसी प्रकार 07 वर्ष से अधिक अवधि के सजा वाले प्रकरणों में घटना स्थल पर उपलब्ध भौतिक एवं परिस्थिति जन्य साक्ष्यों के संकलन हेतु एफएसएल अधिकारियों के उपस्थिति में घटना स्थल का निरीक्षण कराया जावे एवं रिर्पोट प्राप्त किया जाकर माननीय न्यायालय में प्रस्तुत करने संबंधी विषयों पर गहन चर्चा किया गया। इसके अतिरिक्त उन्होनें कहा कि एनडीपीएस. एक्ट के अधिकांश प्रकरणों में आज्ञापक प्रावधानों का पालन अभी भी अन्वेषण/विवेचना अधिकारियों द्वारा नही किया जा रहा है। विवेचकों को एनडीपीएस. एक्ट के प्रावधानों की विवेचना में सुधार हेतु समय-समय पर इकाई स्तर पर विवेचकों का रिफ्रेशर कोर्स कराये जाने हेतु निर्देशित किया गया।
रेंज स्तरीय दोषमुक्ति समीक्षा बैठक के दौरान उमनि/वरि. पुलिस अधीक्षक सरगुजा राजेश अग्रवाल, सूरजपुर प्रशांत ठाकुर, जशपुर लाल उमेद सिंह, पुलिस अधीक्षक कोरिया रवि कुर्रे, बलरामपुर वैभव बैंकर, एमसीबी रत्ना सिंह, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक जशपुर राकेश पाटनवार सहित संभाग के लोक अभियोजन अधिकारी उपस्थित रहें।





















