

अम्बिकेश गुप्ता
कुसमी। बलरामपुर-रामानुजगंज जिले को टीबी (क्षय रोग) मुक्त बनाने की दिशा में स्वास्थ्य विभाग द्वारा व्यापक स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। भारत सरकार के "टीबी मुक्त भारत अभियान" के तहत संचालित 100 दिवसीय सघन अभियान का शुभारंभ 24 मार्च 2026 को विश्व क्षय रोग दिवस के अवसर पर किया गया था। इस अभियान का उद्देश्य ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों में हैंड-हेल्ड एक्स-रे मशीनों के माध्यम से संभावित टीबी मरीजों की पहचान कर समय पर जांच एवं उपचार सुनिश्चित करना है।
यह अभियान कलेक्टर चंदन त्रिपाठी के निर्देशन तथा मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत नयनतारा सिंह तोमर के मार्गदर्शन में संचालित किया जा रहा है। वहीं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. विजय कुमार सिंह के नेतृत्व में स्वास्थ्य विभाग द्वारा अभियान को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाया जा रहा है।
अभियान के अंतर्गत जिले में उच्च जोखिम वाले संभावित व्यक्तियों की पहचान कर उनकी स्क्रीनिंग एवं एक्स-रे जांच की जा रही है। इसी क्रम में 20 जून को विकासखंड कुसमी के दूरस्थ एवं वनांचल क्षेत्र स्थित ग्राम पुंदाग में विशेष आयुष्मान आरोग्य शिविर का आयोजन किया गया। शिविर के दौरान उच्च जोखिम वाले 102 व्यक्तियों को चिन्हांकित कर उनका एक्स-रे परीक्षण किया गया। वहीं विकासखंड कुसमी क्षेत्र में आयोजित शिविर में 85 लोगों की एक्स-रे जांच की गई तथा 50 लोगों को आवश्यक दवाओं का वितरण भी किया गया।
स्वास्थ्य विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार 20 जून तक जिले में कुल 114 विशेष शिविरों का आयोजन किया जा चुका है, जिनके माध्यम से 15,109 लोगों का एक्स-रे परीक्षण किया गया है। अभियान के तहत गांव-गांव एवं शहर-शहर पहुंचकर संभावित टीबी मरीजों की पहचान की जा रही है, जिससे बीमारी का समय रहते पता लगाकर उपचार प्रारंभ किया जा सके।
सेक्टर पीएचसी सबाग की स्वास्थ्य टीम द्वारा भी अभियान को सफल बनाने में सक्रिय भूमिका निभाई जा रही है। स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि टीबी एक पूर्णतः उपचार योग्य बीमारी है तथा समय पर जांच एवं नियमित दवा सेवन से इसे पूरी तरह ठीक किया जा सकता है। इसलिए लोगों से अपील की जा रही है कि लगातार खांसी, वजन कम होना, बुखार या कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई देने पर तत्काल स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराएं।
जिला प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा संचालित यह विशेष अभियान जिले को टीबी मुक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो रहा है तथा ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को मजबूत कर रहा है।





















