

पेंड्रा: मरवाही वन मंडल में कैंपा योजना और ग्रीन क्रेडिट योजना के तहत हुए कथित वित्तीय अनियमितताओं का मामला सामने आया है। राज्य स्तरीय जांच दल ने जांच में करीब 32.77 लाख रुपये की अनियमितता पाए जाने के बाद संबंधित अधिकारियों से राशि की वसूली और आवश्यक कार्रवाई की अनुशंसा की है।
जानकारी के अनुसार, कैंपा और ग्रीन क्रेडिट योजना के तहत वृक्षारोपण के लिए शासन द्वारा लाखों रुपये की स्वीकृति दी गई थी। इस योजना के तहत कुल 5 लाख 71 हजार 901 पौधे तैयार किए जाने थे।आरोप है कि मरवाही वन परिक्षेत्र की चिचगोहना रोपणी और खोड़री क्षेत्र की साधवानी रोपणी में निर्धारित संख्या में पौधे तैयार नहीं किए गए। इसके बावजूद रोपणी में उपयोग होने वाली सामग्री जैसे पॉलिथीन बैग, रेत, गोबर खाद, उपजाऊ मिट्टी, बोनमील और सागौन रूट-शूट की खरीदी स्वीकृति आदेश जारी होने से पहले ही कर ली गई।मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्कालीन मुख्य वन संरक्षक, बिलासपुर वृत्त प्रभाव मिश्रा के निर्देश पर जांच दल गठित किया गया। जांच में शिकायत को सही पाया गया।
जांच रिपोर्ट के मुताबिक, ग्रीन क्रेडिट योजना के तहत नए पौधे तैयार करने के बजाय वर्ष 2023-24 में मनरेगा मद से तैयार किए गए 59 हजार ताड़ पौधों का उपयोग किया गया। इसके अलावा 47 हजार 606 पौधे कटघोरा वन मंडल से प्राप्त कर योजना में शामिल किए गए।
राज्य स्तरीय जांच दल ने कुल 32.77 लाख रुपये की अनियमितता का उल्लेख करते हुए इसकी वसूली और संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए 1 जून 2026 को प्रधान मुख्य वन संरक्षक को पत्र भेजा है।हालांकि, शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि वसूली और कार्रवाई के बजाय विभाग के कुछ अधिकारी बार-बार नई जांच समितियां गठित कर मामले को दबाने का प्रयास कर रहे हैं। वहीं, वर्तमान डीएफओ ग्रीष्मी चांद पर भी भ्रष्ट कर्मचारियों को संरक्षण देने के आरोप लगाए गए हैं।फिलहाल, इन आरोपों पर वन विभाग की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। विभागीय पक्ष आने के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।





















