भोपाल। गोवा और उत्तराखंड के बाद अब मध्य प्रदेश में भी समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की दिशा में सरकार ने कदम तेज कर दिए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने संकेत दिया है कि आगामी मानसून सत्र में यूसीसी का प्रस्ताव विधानसभा में पेश किया जाएगा। उन्होंने विश्वास जताया कि यदि सब कुछ अनुकूल रहा तो इसी सत्र में प्रस्ताव पारित भी हो सकता है। इसके साथ ही सरकार ने प्रदेशभर में सुझाव जुटाने के लिए व्यापक सर्वे अभियान शुरू कर दिया है।

गांव से शहर तक लोगों से मांगे जा रहे सुझाव

मुख्यमंत्री के निर्देश पर प्रदेश के गांवों, कस्बों और शहरों में यूसीसी को लेकर लोगों की राय ली जा रही है। सर्वे के दौरान नागरिकों से नाम, धर्म, जिला, पता और मोबाइल नंबर जैसी सामान्य जानकारी ली जा रही है। इसके अलावा 12 महत्वपूर्ण सवालों पर 'हां' या 'ना' में जवाब मांगे जा रहे हैं।

महिलाओं के अधिकार और पारिवारिक कानून पर विशेष फोकस

सर्वे में शामिल अधिकांश प्रश्न महिलाओं के अधिकार, विवाह, तलाक और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे विषयों से जुड़े हैं। इन मुद्दों पर आम लोगों की राय जानकर सरकार प्रस्तावित कानून का प्रारूप तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और शिक्षकों को मिली जिम्मेदारी

सर्वे अभियान के संचालन की जिम्मेदारी आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और शिक्षकों को सौंपी गई है। उन्हें प्रतिदिन निर्धारित संख्या में फॉर्म भरवाने का लक्ष्य दिया गया है। साथ ही सर्वे पूरा होने के बाद संबंधित अधिकारियों को उसकी जानकारी और आवश्यक प्रमाण भेजने के निर्देश भी दिए गए हैं।

मानसून सत्र से पहले बिल लाने की तैयारी

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि मध्य प्रदेश जल्द ही उन बड़े राज्यों में शामिल होगा जहां समान नागरिक संहिता लागू होगी। उन्होंने कहा कि सरकार वर्षाकालीन विधानसभा सत्र में यूसीसी से संबंधित विधेयक लाने की तैयारी कर रही है। उनके अनुसार, जब देश में एक संविधान और समान शासन व्यवस्था है, तो अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों की व्यवस्था पर भी व्यापक विचार होना चाहिए।

विशेषज्ञों और विभिन्न समुदायों से लिए जा रहे सुझाव

मुख्यमंत्री ने बताया कि यूसीसी के विभिन्न पहलुओं का अध्ययन करने के लिए समिति का गठन किया गया है। सरकार कानून विशेषज्ञों, सामाजिक संगठनों और विभिन्न समुदायों से सुझाव ले रही है। उन्होंने यह भी कहा कि मुस्लिम समुदाय के कई लोगों ने भी सकारात्मक सुझाव दिए हैं और सरकार सभी पक्षों की राय को गंभीरता से शामिल करने का प्रयास कर रही है।

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