

मध्य प्रदेश : मऊगंज जिले से महिला सशक्तिकरण की योजनाओं पर सवाल खड़ा करने वाली स्थिति सामने आई है। यहां 5000 से अधिक लाड़ली बहनों और स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं ने अपने रोजगार को बचाने के लिए कलेक्ट्रेट पहुंचकर जोरदार विरोध दर्ज कराया।
रोजगार बचाने के लिए सड़क पर उतरीं महिलाएं
स्कूलों और आंगनबाड़ियों में भोजन निर्माण कार्य से जुड़ी हजारों महिलाएं लंबे समय से इसी काम के जरिए अपने परिवार का पालन-पोषण कर रही हैं। लेकिन अब इस व्यवस्था को खत्म कर ठेकेदारी प्रणाली लागू किए जाने की चर्चा से महिलाओं में गहरी चिंता फैल गई है।
इसी के विरोध में बड़ी संख्या में महिलाएं एकजुट होकर कलेक्ट्रेट पहुंचीं और जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा।
स्वयं सहायता समूहों की आजीविका पर खतरा
महिलाओं का कहना है कि स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिला था। इसी आय से वे बच्चों की पढ़ाई, घर का खर्च और रोजमर्रा की जरूरतें पूरी कर रही हैं। अगर यह काम ठेकेदारों को सौंप दिया गया तो हजारों परिवारों की आर्थिक स्थिति बिगड़ सकती है।
ठेकेदारी व्यवस्था पर गंभीर आरोप
प्रदर्शन कर रही महिलाओं ने आरोप लगाया कि ठेकेदारी प्रणाली लागू होने पर स्थानीय समूहों की भूमिका पूरी तरह खत्म हो जाएगी। वर्षों से काम कर रही महिलाएं अचानक बेरोजगारी की स्थिति में आ सकती हैं।
उनका कहना है कि यह कदम महिला सशक्तिकरण की भावना के खिलाफ होगा और इससे जमीनी स्तर पर काम कर रहे समूहों का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा।
कलेक्ट्रेट पहुंचकर सौंपा ज्ञापन
प्रदर्शन के दौरान महिलाओं ने अपनी मांगों को लेकर जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा और मौजूदा व्यवस्था को जारी रखने की अपील की। उन्होंने स्पष्ट कहा कि भोजन निर्माण का कार्य समूहों के पास ही रहना चाहिए।
प्रशासन के फैसले पर टिकी निगाहें
फिलहाल पूरा मामला जिला प्रशासन के विचाराधीन है। अब देखना होगा कि सरकार और प्रशासन इस व्यवस्था पर क्या निर्णय लेते हैं। महिलाओं को उम्मीद है कि उनकी आजीविका सुरक्षित रहेगी, जबकि बदलाव की आशंका ने उनके भविष्य को अनिश्चितता में डाल दिया है।





















