नरसिंहपुर। मध्य प्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल की परीक्षा मूल्यांकन प्रक्रिया एक बार फिर विवादों में घिर गई है। नरसिंहपुर जिले के बरमान की रहने वाली 12वीं की छात्रा एकता साहू ने अपनी केमिस्ट्री उत्तरपुस्तिका की जांच में गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाया है। छात्रा का दावा है कि मूल्यांकन में हुई कथित लापरवाही के कारण वह मेधावी छात्र योजना के लाभ और सरकार की स्कूटी योजना से वंचित हो गई।

सिर्फ 2 प्रतिशत अंकों ने बदल दी तस्वीर

एकता साहू को परीक्षा परिणाम में अपेक्षा से काफी कम अंक मिले। इससे वह मेधावी छात्र योजना की पात्रता से महज 2 प्रतिशत अंकों के अंतर से बाहर हो गई। छात्रा और उसके परिवार का कहना है कि यदि उत्तरपुस्तिका का सही मूल्यांकन किया जाता तो वह इस योजना का लाभ पाने की हकदार होती।

री-टोटलिंग से नहीं मिला समाधान

परिणाम से असंतुष्ट छात्रा ने सबसे पहले री-टोटलिंग के लिए आवेदन किया। हालांकि वहां भी अंकों में कोई बदलाव नहीं हुआ। इसके बाद उसने निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपनी उत्तरपुस्तिका की प्रति प्राप्त की। कॉपी देखने के बाद छात्रा और उसके परिजन हैरान रह गए।

उनका आरोप है कि कई सही उत्तरों को गलत मानकर काट दिया गया, जबकि कुछ स्थानों पर रासायनिक सूत्रों और उत्तरों के मूल्यांकन में भी गंभीर त्रुटियां दिखाई दे रही हैं।

20 से 25 अंक बढ़ने का दावा

एकता का कहना है कि उसकी उत्तरपुस्तिका का निष्पक्ष और दोबारा मूल्यांकन कराया जाए तो उसके 20 से 25 अंक तक बढ़ सकते हैं। छात्रा का आरोप है कि मूल्यांकन के दौरान कई उत्तरों को बिना उचित कारण गलत घोषित कर दिया गया।

कॉलेज के प्रोफेसर ने भी जताई आपत्ति

मामले को और गंभीर तब माना जा रहा है जब छात्रा की उत्तरपुस्तिका को रसायन शास्त्र के विशेषज्ञ के सामने रखा गया। करेली कॉलेज के रसायन शास्त्र के सहायक प्रोफेसर रामसेवक कुशवाहा ने भी मूल्यांकन में चूक की संभावना जताई है।

उनके अनुसार उत्तरपुस्तिका का अवलोकन करने पर स्पष्ट रूप से प्रतीत होता है कि छात्रा को कई उत्तरों के अंक नहीं दिए गए। प्रोफेसर का मानना है कि पुनर्मूल्यांकन होने पर 18 से 20 अंक तक बढ़ने की संभावना दिखाई देती है।

बोर्ड को भेजी शिकायत, जवाब का इंतजार

छात्रा ने अपनी उत्तरपुस्तिका और संबंधित दस्तावेजों के साथ मध्य प्रदेश बोर्ड को आधिकारिक ई-मेल के माध्यम से शिकायत भेजी है। इसके बावजूद अब तक बोर्ड की ओर से कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया या कार्रवाई सामने नहीं आई है।

शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता पर उठे सवाल

इस पूरे मामले ने बोर्ड की मूल्यांकन प्रक्रिया की विश्वसनीयता और पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। छात्रा और उसके परिजन अब निष्पक्ष जांच और उत्तरपुस्तिका के पुनर्मूल्यांकन की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि समय रहते न्याय नहीं मिला, तो एक प्रतिभाशाली छात्रा अपने अधिकार और सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित रह जाएगी।

अब निगाहें बोर्ड के फैसले पर

एकता साहू का मामला केवल एक छात्रा का विवाद नहीं, बल्कि परीक्षा मूल्यांकन व्यवस्था की जवाबदेही से जुड़ा प्रश्न बन गया है। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि बोर्ड इस शिकायत पर क्या कदम उठाता है और छात्रा को न्याय मिल पाता है या नहीं।

Leave a reply

Please enter your name here
Please enter your comment!