मुरैना। शिक्षा विभाग में रिकॉर्ड संधारण की गंभीर लापरवाही सामने आने के बाद प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है। विभागीय जांच में खुलासा हुआ है कि कई शिक्षकों की सेवा पुस्तिकाओं से नियुक्ति आदेश, गोपनीय चरित्रावली, क्रमोन्नति आदेश समेत कई महत्वपूर्ण दस्तावेज गायब हैं। हैरानी की बात यह है कि इनमें से कई शिक्षक पिछले 35 वर्षों से सेवा दे रहे हैं।

सेवा पुस्तिकाओं से गायब मिले अहम दस्तावेज

जांच के दौरान यह सामने आया कि कई शिक्षकों की सेवा पुस्तिकाओं के शुरुआती पृष्ठ तक उपलब्ध नहीं हैं। इसके अलावा प्रथम नियुक्ति से जुड़े रिकॉर्ड, वार्षिक गोपनीय प्रतिवेदन और 12, 24 तथा 30 वर्ष की क्रमोन्नति से संबंधित आदेश भी फाइलों में नहीं मिले। इस खुलासे के बाद विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

वेतन और पेंशन पर मंडराने लगा संकट

रिकॉर्ड अधूरे मिलने से शिक्षकों के वेतन निर्धारण, पदोन्नति लाभ और भविष्य में मिलने वाली पेंशन संबंधी प्रक्रियाओं पर भी असर पड़ सकता है। यदि आवश्यक दस्तावेज समय पर उपलब्ध नहीं हुए तो कई कर्मचारियों को वित्तीय और प्रशासनिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

डीईओ ने शुरू कराई जांच, अधिकारियों को दिए निर्देश

मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला शिक्षा अधिकारी ने तत्काल जांच शुरू कर दी है। अधूरे रिकॉर्ड वाले कर्मचारियों की सूची तैयार कर संबंधित ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों और संकुल प्राचार्यों को आवश्यक दस्तावेज जुटाने के निर्देश दिए गए हैं।

विभाग ने स्पष्ट किया है कि सेवा पुस्तिका, नियुक्ति आदेश, गोपनीय चरित्रावली और क्रमोन्नति संबंधी सभी अभिलेख सुरक्षित रखना अनिवार्य है। ऐसे में इतने वर्षों तक रिकॉर्ड का अधूरा रहना बड़ी प्रशासनिक चूक माना जा रहा है।

35 साल तक किसी ने क्यों नहीं की जांच?

सबसे बड़ा सवाल यह है कि इतने महत्वपूर्ण दस्तावेज गायब होने के बावजूद वर्षों तक किसी अधिकारी ने इसकी समीक्षा क्यों नहीं की। क्या यह केवल लापरवाही का मामला है या फिर रिकॉर्ड प्रबंधन में कहीं गंभीर अनियमितता हुई है? इन सवालों ने शिक्षा विभाग को कटघरे में खड़ा कर दिया है।

जांच रिपोर्ट पर टिकी सबकी नजर

शिक्षकों के भविष्य और सरकारी रिकॉर्ड की विश्वसनीयता से जुड़े इस मामले ने विभागीय व्यवस्था की पोल खोल दी है। अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट पर है, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि दस्तावेजों के गायब होने के लिए जिम्मेदार कौन है और दोषियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाएगी।

शिक्षा विभाग की व्यवस्था पर उठे बड़े सवाल

यह मामला केवल कुछ फाइलों के गायब होने तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकारी अभिलेखों के रखरखाव और जवाबदेही की पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। यदि समय रहते दस्तावेजों का सत्यापन और संरक्षण किया जाता, तो आज शिक्षकों को इस तरह की अनिश्चितता का सामना नहीं करना पड़ता।

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