बलरामपुर:  जिले में पशुपालकों को उनके घर के समीप ही बेहतर पशु चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से पशुधन विकास विभाग द्वारा मोबाइल पशु चिकित्सा इकाई का सफल संचालन किया जा रहा है। कलेक्टर  चंदन संजय त्रिपाठी के निर्देशानुसार जिले के सभी छह विकासखंडों में मोबाइल पशु चिकित्सा वाहनों का नियमित संचालन किया जा रहा है, जिससे दूरस्थ क्षेत्रों के पशुपालकों को समय पर उपचार एवं तकनीकी मार्गदर्शन मिल रहा है।

पशुधन विकास विभाग द्वारा निर्धारित रोस्टर के अनुसार चिकित्सा इकाई का संचालन प्रतिदिन तीन गांवों में शिविर आयोजित कर प्रातः 8 बजे से शाम 4 बजे तक पशुओं को निःशुल्क स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की जा रही है। इन शिविरों में पशुओं का उपचार, टीकाकरण, कृमिनाशक दवापान, डिटिकिंग, बधियाकरण, कृत्रिम गर्भाधान तथा औषधि वितरण किया जा रहा है।अब तक जिले में 14 हजार 374 पशु चिकित्सा शिविरों का आयोजन किया जा चुका है। इन शिविरों के माध्यम से 1 लाख 67 हजार 176 पशुओं का उपचार, 1 लाख 38 हजार 892 पशुओं का टीकाकरण, 87 हजार 143 पशुओं को औषधि वितरण, 53 हजार 940 नमूनों की जांच, 12 हजार 758 बधियाकरण तथा 710 कृत्रिम गर्भाधान सेवाएं प्रदान की जा चुकी हैं।

वर्तमान में मोबाइल पशु चिकित्सा इकाइयों के माध्यम से दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सकीय सेवाओं के साथ-साथ विभागीय योजनाओं के व्यापक प्रचार-प्रसार का किया जा रहा हैं। पशुपालकों को मौसमी बीमारियों से बचाव, पशुओं के रख-रखाव तथा किसान क्रेडिट कार्ड जैसी योजनाओं की जानकारी देकर लाभ लेने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। प्रत्येक मोबाइल यूनिट में एक पशु चिकित्सक, एक पैरावेट तथा एक अटेंडेंट सह चालक की तैनाती की गई है। वाहनों में आवश्यक दवाइयों एवं आधुनिक चिकित्सकीय उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है, जिससे मौके पर ही उपचार एवं अन्य सेवाएं प्रदान की जा सकें।

राज्य शासन द्वारा पशुपालकों की सुविधा के लिए जारी 1962 टोल फ्री नंबर के माध्यम से सड़क दुर्घटनाओं में घायल अथवा घर पर बीमार पशुओं के उपचार की निःशुल्क सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। घर पहुंच सेवाओं के कारण पशुओं के स्वास्थ्य में सुधार हुआ है। जिससे दुग्ध, मांस एवं अंडा उत्पादन में वृद्धि के साथ पशुपालकों की आय में भी निरंतर बढ़ोतरी हो रही है।

वर्षा ऋतु को ध्यान में रखते हुए मोबाइल पशु चिकित्सा इकाई की टीम के द्वारा पशुपालकों को पशुओं को सूखे एवं सुरक्षित स्थानों पर रखने, संक्रमण से बचाव करने तथा आंधी-तूफान के दौरान पेड़ों के नीचे पशुओं को न बांधने की सलाह भी दे रही है। मोबाइल पशु चिकित्सा इकाई की पहल पशुपालकों के लिए संजीवनी साबित हो रही है तथा पशुधन विकास के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

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