नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट SIR की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर आज फैसला सुनाएगा। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ याचिकाओं के एक बैच पर ये फैसला सुनाएगी। सर्वोच्च अदालत ये तय करेगी कि क्या चुनाव आयोग के पास मौजूदा रूप में SIR करने के लिए संविधान के अनुच्छेद 326, जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 और उसके तहत बनाए गए नियमों के तहत शक्तियां हैं या नहीं।

29 जनवरी को सुरक्षित रखा गया था फैसला

लाइन लॉ में छपी एक रिपोर्ट के मुातबिक, सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में 29 जनवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। अभी तक कोर्ट की तरफ से SIR प्रक्रिया पर कोई रोक नहीं लगाई गई है और यह प्रक्रिया बिहार, केरल, तमिलनाडु, पुडुचेरी और पश्चिम बंगाल में पूरी हो चुकी है। यूपी, गुजरात और राजस्थान जैसे कई राज्यों में ये अभी जारी है।

याचिकाकर्ताओं में अलग-अलग पार्टियों के सांसद शामिल
इनमें से ज्यादातर याचिकाएं जून, 2025 में चुनाव आयोग की तरफ से बिहार में SIR करने के फैसले के बाद दाखिल की गई थीं। इनमें द एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स, पॉलिटिकल एक्टिविस्ट योगेंद्र यादव, टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा, आरजेडी सांसद मनोज झा, कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल, एनसीपी एसपी सांसद सुप्रिया सुले और अन्य याचिकाकर्ताओं का नाम शामिल है।

सुनवाई के दौरान आधार कार्ड पर दिया था अहम निर्देश
सुनवाई के दौरान पिछले साल, सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया था कि वह आधार कार्ड को '12वें दस्तावेज' के रूप में माने, जिसको बिहार की संशोधित वोटर लिस्ट में शामिल होने के लिए पहचान प्रमाण के तौर पर पेश किया जा सकता है। हालांकि, सर्वोच्च अदालत ने ये साफ किया था कि आधार नागरिकता का प्रमाण नहीं होगा। चुनाव आयोग के अधिकारी मतदाताओं की तरफ से पेश किए गए आधार कार्ड की प्रामाणिकता और वास्तविकता की जांच कर सकते हैं।

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