जगदलपुर। बस्तर संभाग के युवाओं और खेल प्रतिभाओं के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है। जगदलपुर में बस्तर की पहली आवासीय खेल अकादमी शुरू होने जा रही है। यह पहल क्षेत्र के प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को राष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं और आधुनिक प्रशिक्षण उपलब्ध कराने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है।खेल एवं युवा कल्याण विभाग के अनुसार अकादमी के लिए 28 मई से दो दिवसीय राज्य स्तरीय चयन ट्रायल आयोजित किया जाएगा। माना जा रहा है कि इससे बस्तर के युवाओं को अपने खेल करियर को नई दिशा देने का अवसर मिलेगा।

13 से 17 वर्ष के खिलाड़ियों को मिलेगा विशेष प्रशिक्षण

प्रस्तावित आवासीय खेल अकादमी में 13 से 17 वर्ष आयु वर्ग के खिलाड़ी प्रवेश ले सकेंगे। यहां खिलाड़ियों को आधुनिक खेल सुविधाओं के साथ उच्च स्तरीय आवासीय प्रशिक्षण दिया जाएगा।अकादमी में फुटबॉल के लिए 25 सीटें, एथलेटिक्स के लिए 20 सीटें और बस्तर की पारंपरिक एवं लोकप्रिय खेल विधा आर्चरी के लिए 20 सीटों का प्रावधान किया गया है।खेल विभाग का कहना है कि खिलाड़ियों को तकनीकी प्रशिक्षण के साथ फिटनेस, अनुशासन और प्रतियोगी माहौल भी उपलब्ध कराया जाएगा।

ग्रामीण और शहरी दोनों प्रतिभाओं को मिलेगा फायदा

खेल एवं युवा कल्याण विभाग के अधिकारियों के मुताबिक इस अकादमी से सिर्फ शहर के खिलाड़ियों को ही नहीं, बल्कि आसपास के ग्रामीण इलाकों के प्रतिभाशाली बच्चों को भी बड़ा लाभ मिलेगा।अब तक संभाग में उपलब्ध अधिकांश आवासीय खेल सुविधाएं ग्रामीण क्षेत्रों में केंद्रित थीं, जिसके कारण शहरी और आसपास के क्षेत्रों के खिलाड़ियों को सीमित अवसर मिल पाते थे। लेकिन शहर में अकादमी शुरू होने के बाद स्थिति बदलने की उम्मीद है।

डेज बोर्डिंग सुविधा से बढ़ेंगे अवसर

नई व्यवस्था के तहत ग्रामीण क्षेत्रों के खिलाड़ी अकादमी परिसर में रहकर नियमित अभ्यास कर सकेंगे। वहीं शहरी क्षेत्र के खिलाड़ी डेज बोर्डिंग सिस्टम के तहत घर से आकर प्रशिक्षण ले पाएंगे।इस मॉडल से दोनों वर्गों के खिलाड़ियों को समान अवसर और बेहतर खेल वातावरण मिलेगा। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि इससे बस्तर के खिलाड़ियों की राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भागीदारी बढ़ सकती है।

बस्तर में खेल संस्कृति को मिलेगी नई पहचान

जगदलपुर में पहली आवासीय खेल अकादमी की शुरुआत को बस्तर में खेल संस्कृति के विकास की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। खासतौर पर आर्चरी जैसी पारंपरिक खेल विधा को बढ़ावा मिलने से स्थानीय प्रतिभाओं को राष्ट्रीय मंच तक पहुंचने का मौका मिल सकता है।

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