

भोपाल : से जुड़ी प्रशासनिक व्यवस्था में बड़ा कदम उठाने की तैयारी है। राज्य में बीते तीन महीनों के भीतर 9 अलग अलग मामलों में मुख्य सचिव को पक्षकार बनाए जाने के बाद अब उनका नाम मुकदमों से हटाने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।
कोर्ट मामलों में अनावश्यक पक्षकार बनाए जाने पर आपत्ति
हाईकोर्ट और Supreme Court of India में लंबित कई मामलों, खासकर निकाय से जुड़े प्रकरणों में मुख्य सचिव को भी प्रतिवादी बनाया गया है। अब इसे लेकर प्रशासन ने आपत्ति जताई है और नाम हटवाने की योजना बनाई है।
अफसर करेंगे नाम विलोपन की प्रक्रिया
इस दिशा में विभागीय स्तर पर पहल की जाएगी।
एसीएस, प्रमुख सचिव, सचिव और कलेक्टर संबंधित अदालतों में आवेदन प्रस्तुत कर मुख्य सचिव का नाम हटवाएंगे। इसका उद्देश्य यह है कि उन्हें अनावश्यक रूप से नोटिस जारी न हों।
जीएडी ने जारी किए निर्देश
सामान्य प्रशासन विभाग ने स्पष्ट किया है कि मुख्य सचिव किसी एक विभाग के प्रभारी नहीं होते। ऐसे में जिन मामलों में उनका नाम जोड़ा गया है, वहां से उसे हटाना जरूरी है।
सभी विभागों को इस संबंध में आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
आंकड़ों में समझें स्थिति
साल 2026 में अब तक 38 मामलों में से 9 में मुख्य सचिव को प्रतिवादी बनाया गया है। इनमें दो मामले अवमानना से जुड़े हैं।
वहीं वर्ष 2025 में कुल 88 मामलों में से 15 में मुख्य सचिव का नाम शामिल था।
प्रशासनिक रणनीति का हिस्सा
सरकार का मानना है कि अनावश्यक रूप से मुख्य सचिव को पक्षकार बनाने से प्रशासनिक प्रक्रिया प्रभावित होती है। इसी वजह से अब व्यवस्थित तरीके से उनका नाम हटाने की रणनीति अपनाई जा रही है।

































