रायपुर। 4 अप्रैल 2026 – छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन ने इस साल आरटीई (शिक्षा के अधिकार) कानून के तहत निजी स्कूलों में प्रवेश नहीं देने का ऐलान कर दिया है। एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव गुप्ता ने कहा कि राज्य सरकार अगर बिलासपुर हाईकोर्ट के आदेश का पालन नहीं करती, तो उनका आंदोलन और तेज होगा।

आंदोलन का कारण: प्रतिपूर्ति राशि का विवाद

राजीव गुप्ता ने बताया कि प्राइवेट स्कूलों की मांग है कि आरटीई के तहत राज्य सरकार द्वारा तय की गई प्रतिपूर्ति राशि को बढ़ाया जाए। इस वर्ष प्रदेश के 6000 से अधिक निजी स्कूलों में प्रवेश प्रक्रिया लॉटरी के माध्यम से होती है, लेकिन एसोसिएशन ने छात्रों के प्रवेश में सहयोग न देने का फैसला किया है। उनका कहना है कि ऑनलाइन चयनित विद्यार्थियों को स्कूलों में प्रवेश देने में अब सहयोग नहीं किया जाएगा।

शिक्षा विभाग की लापरवाही और संवेदनहीन रवैया

एसोसिएशन ने शिक्षा विभाग की अनदेखी को लेकर कहा कि लगातार विलंब और संवेदनहीन रवैया प्रदेश के वंचित वर्ग के छात्रों की शिक्षा पर असर डाल रहा है। राजीव गुप्ता ने बताया कि उन्हें मजबूरन यह कदम उठाना पड़ा क्योंकि शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है।

प्रतिपूर्ति राशि का इतिहास

आरटीई के तहत प्रवेश पहली बार 2011 में निजी स्कूलों में शुरू हुआ था। उस समय कक्षा पहली से पांचवीं तक प्रतिपूर्ति राशि 7000/- रुपये प्रति विद्यार्थी और कक्षा छठवीं से आठवीं तक 11,400/- रुपये तय की गई थी। 2018 में कक्षा नवमीं से बारहवीं को आरटीई के दायरे में लाया गया और राशि 15,000/- रुपये प्रति विद्यार्थी प्रति वर्ष तय की गई।

हाईकोर्ट का आदेश और सरकार की अनदेखी

एसोसिएशन ने 2016 से प्रतिपूर्ति राशि बढ़ाने की मांग की है। लगातार अनदेखी होने पर जुलाई 2025 में बिलासपुर हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई। सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने सरकार को छह महीने के भीतर कार्रवाई का निर्देश दिया। इसके बावजूद सरकार ने अभ्यावेदन पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया, जिसके कारण मार्च 2026 में प्रदेश कार्यकारिणी ने असहयोग आंदोलन का ऐलान किया।

असहयोग आंदोलन जारी

राजीव गुप्ता ने बताया कि अब तक विभाग के किसी पत्र या नोटिस का जवाब नहीं दिया जा रहा। मार्च से पूरे प्रदेश में जिलावार असहयोग आंदोलन चल रहा है। उनका कहना है कि वर्तमान प्रतिपूर्ति राशि इतनी कम है कि यह छात्रों की शैक्षणिक गुणवत्ता को प्रभावित कर रही है।

अन्य राज्यों के मुकाबले छत्तीसगढ़ की प्रतिपूर्ति कम

अन्य राज्यों में प्रतिपूर्ति राशि छत्तीसगढ़ से काफी अधिक है। उदाहरण के लिए:

  • असम: 16,396/-
  • चंडीगढ़: 28,176/-
  • गुजरात: 13,000/-
  • हिमाचल प्रदेश: 34,744/-
  • कर्नाटक: 8,000/- एवं 16,000/-
  • महाराष्ट्र: 17,670/-
  • उड़ीसा: 21,247/-
  • राजस्थान: 10,688/-
  • तमिलनाडु: 11,700/-
  • उत्तराखंड: 16,596/-

छत्तीसगढ़ से कम प्रतिपूर्ति सिर्फ तीन राज्यों में है – बिहार, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश।

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