अम्बिकेश गुप्ता

कुसमी। बलरामपुर जिले के कुसमी विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत नवाडीह कला (बरवाही पारा) स्थित प्राथमिक/माध्यमिक शाला में छात्रा पर पानी उड़ेलने का मामला अब और गंभीर रूप ले चुका है। शुरुआती शिकायत के बाद जहां यह मामला अनुशासनात्मक कार्रवाई तक सीमित माना जा रहा था, वहीं अब जांच के दौरान सामने आए नए आरोपों ने पूरे घटनाक्रम को झकझोर कर रख दिया है।

मीडिया में मामला उजागर होने और शिकायत मिलने के बाद शिक्षा विभाग ने तत्काल तीन सदस्यीय जांच टीम गठित की। शुक्रवार को टीम स्कूल पहुंची, जहां पालकों, ग्रामीणों और शिकायतकर्ताओं की मौजूदगी में पंचनामा तैयार किया गया हैं आगे की कार्यवाही जांच प्रतिवेदन विभाग सौंपे जाने की बाद सामने आएगी।

जांच में चौंकाने वाले आरोप सामने आए

जांच के दौरान दो बच्चों द्वारा लगाए गए आरोपों ने मामले को बेहद संवेदनशील बना दिया है। एक बच्चे ने आरोप लगाया कि उसे सजा के रूप में मध्यान्ह भोजन की थाली में पहले पेशाब करने को मजबूर किया गया और फिर उसी थाली में भोजन करने के लिए कहा गया। डर के कारण उसने वैसा ही किया। वहीं दूसरे बच्चे ने शिक्षक अशोक प्रसाद गुप्ता पर लात मारकर मारपीट करने का आरोप लगाया। उक्त आरोपों ने शिक्षा व्यवस्था और बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जांच प्रक्रिया पर भी उठे सवाल

ग्रामीणों और अभिभावकों ने जांच प्रक्रिया की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि जांच के दौरान आरोपी शिक्षक मौके पर मौजूद थे और हस्तक्षेप कर रहे थे. बच्चों के बयान और वीडियो रिकॉर्डिंग के समय वीडियो बनाने से रोका गया. पंचनामा सौंपते समय जांच दल के दो सदस्य मौजूद नहीं थे. ग्रामीणों का कहना है कि इससे जांच प्रक्रिया प्रभावित हुई और मामले को दबाने की कोशिश की गई।

गांव में आक्रोश, सख्त कार्रवाई की मांग

घटना के बाद पूरे गांव में भारी आक्रोश व्याप्त है। अभिभावकों और ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कर दोषी शिक्षक पर कड़ी कार्रवाई की जाए। साथ ही स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।

शिक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

यह मामला केवल एक स्कूल या एक शिक्षक तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह शिक्षा के मंदिर कहे जाने वाले विद्यालयों में बच्चों के साथ व्यवहार को लेकर व्यापक चिंता का विषय बन गया है। अब सभी की निगाहें शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

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