

रायपुर: छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित कोयला लेवी घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए आरोपी सौम्या चौरसिया और निखिल चंद्राकर की 8 अचल संपत्तियों को कुर्क किया है। ईडी के रायपुर जोनल कार्यालय के अनुसार, इन संपत्तियों की कुल कीमत करीब 2.66 करोड़ रुपये आंकी गई है, जिनमें जमीन और आवासीय फ्लैट शामिल हैं।
ईडी की जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने ये संपत्तियां अपने रिश्तेदारों के नाम पर खरीदी थीं। जांच एजेंसी का दावा है कि इन संपत्तियों की खरीद अवैध कोयला लेवी और अन्य जबरन वसूली गतिविधियों से अर्जित धन से की गई। इस मामले में ईडी अब तक कुल 273 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियों को अटैच कर चुकी है।
जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि आरोपियों ने अवैध कोयला परिवहन और व्यापार से जुड़ी गतिविधियों पर लेवी वसूली के जरिए भारी रकम जुटाई। इस अवैध धन को बाद में रियल एस्टेट समेत अन्य क्षेत्रों में निवेश किया गया। ईडी ने इन संपत्तियों को ‘प्रोसीड्स ऑफ क्राइम’ मानते हुए कुर्की की कार्रवाई की है।
25 रुपये प्रति टन के हिसाब से होती थी अवैध वसूली
ईडी के अनुसार, जुलाई 2020 से जून 2022 के बीच कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में कारोबारियों, नेताओं और अधिकारियों की कथित मिलीभगत से कोयला परिवहन करने वालों से प्रति टन 25 रुपये की दर से अवैध वसूली की गई। इस अवधि में करीब 540 करोड़ रुपये की अवैध राशि एकत्र की गई।
ईडी का कहना है कि इस नकदी का इस्तेमाल सरकारी अधिकारियों और नेताओं को रिश्वत देने, चुनावी खर्चों की फंडिंग करने और चल-अचल संपत्तियों की खरीद में किया गया। अब तक इस मामले में 11 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि 35 आरोपियों के खिलाफ 5 चार्जशीट विशेष अदालत में दाखिल की जा चुकी हैं।






















