बलौदाबाजार। छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार जिले का छोटा सा खरवे गांव इन दिनों पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बना हुआ है। गांव में बीते तीन महीनों के दौरान हुई आठ रहस्यमयी मौतों ने लोगों को भय और असमंजस में डाल दिया है। हालात ऐसे हैं कि गांव की चौपालों से लेकर घरों तक हर जगह सिर्फ एक ही सवाल गूंज रहा है—क्या ये मौतें सामान्य थीं या इसके पीछे कोई सुनियोजित षड्यंत्र छिपा हुआ है?

फरवरी से शुरू हुआ मौतों का सिलसिला

इस रहस्यमयी घटनाक्रम की शुरुआत फरवरी माह में हुई। सबसे पहले 7 फरवरी को बद्री पटेल की मौत हुई। इसके बाद पुतुल राम साहू और पूर्व सरपंच चैतराम साहू ने भी दम तोड़ दिया। ग्रामीणों का कहना है कि इन सभी मृतकों के जीवन के अंतिम दिनों में एक समान कड़ी दिखाई देती है। दावा किया जा रहा है कि मौत से पहले सभी का संपर्क गांव के एक ही व्यक्ति से हुआ था।

यहीं से गांव में संदेह और आशंकाओं का दौर शुरू हो गया।

एक व्यापारी पर टिक गई ग्रामीणों की नजर

ग्रामीणों के आरोपों के केंद्र में गांव का एक किराना व्यवसायी है। लोगों का कहना है कि वह पहले ग्रामीणों से निकटता बढ़ाता था और बाद में उन्हें एक विशेष प्रकार की शराब पिलाता था। आरोप है कि शराब सेवन के कुछ समय बाद संबंधित व्यक्ति की तबीयत बिगड़ जाती और फिर उसकी मौत हो जाती।

हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन ग्रामीण लगातार इसी दिशा में संदेह जता रहे हैं।

मार्च और अप्रैल में भी नहीं थमा मौतों का क्रम

फरवरी के बाद भी हालात सामान्य नहीं हुए। 14 मार्च को बुधराम जायसवाल की मृत्यु हो गई। इसके बाद विनोद साहू और 28 अप्रैल को गजानन माझी की भी जान चली गई।

ग्रामीणों का दावा है कि इन मामलों में भी वही समान परिस्थितियां देखने को मिलीं, जिससे संदेह और गहरा गया।

मई में दो और मौतों ने बढ़ाई बेचैनी

मई माह में हुई दो और मौतों ने पूरे गांव को झकझोर दिया। 30 अप्रैल को चैतराम साहू और 15 मई को महत्तरू साहू की मृत्यु हो गई। बताया जाता है कि महत्तरू साहू शराब पीने के बाद नदी की ओर गया था और कुछ ही समय बाद उसकी मौत हो गई।

लगातार हो रही घटनाओं ने गांव में तरह-तरह की चर्चाओं को जन्म दे दिया। कुछ लोग इसे रहस्यमयी गतिविधियों से जोड़ रहे हैं तो कुछ इसके पीछे किसी बड़ी साजिश की आशंका जता रहे हैं। हालांकि जांच एजेंसियां तथ्यों और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर मामले की पड़ताल कर रही हैं।

कार्तिक कुमार बना जांच की सबसे अहम कड़ी

इस पूरे घटनाक्रम में कार्तिक कुमार का नाम सबसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बताया जाता है कि वह भी कथित रूप से उसी व्यक्ति के साथ शराब पीने बैठा था, जिसके बाद अन्य लोगों की मौत होने की चर्चा है।

कार्तिक ने शराब पीते ही उसके स्वाद में असामान्य कड़वाहट महसूस की। कुछ ही देर में उसे तेज पेट दर्द और लगातार उल्टियां होने लगीं। हालत बिगड़ने पर उसे गंभीर अवस्था में रायपुर भेजा गया, जहां कई दिनों तक उपचार चला।

चिकित्सकों के अनुसार लगातार उल्टियां होने के कारण यदि कोई हानिकारक पदार्थ शरीर में गया भी हो तो उसका प्रभाव पूरी तरह नहीं फैल पाया। स्वस्थ होने के बाद अब कार्तिक पुलिस जांच का प्रमुख गवाह माना जा रहा है।

ग्रामीणों की शिकायत के बाद हरकत में आया प्रशासन

मामले ने जब गंभीर रूप लिया तो ग्रामीणों ने इसकी शिकायत जिला प्रशासन और पुलिस अधिकारियों से की। इसके बाद प्रशासन ने विस्तृत जांच शुरू कर दी।

कार्यपालिक दंडाधिकारी, राजस्व अधिकारियों, चिकित्सकों और पुलिस दल की उपस्थिति में मृतकों के शव कब्रों से निकालकर दोबारा परीक्षण के लिए भेजे जा रहे हैं। फोरेंसिक विशेषज्ञ भी मामले की जांच में जुटे हुए हैं।

फोरेंसिक रिपोर्ट से खुलेगा रहस्य

अब पूरे गांव की निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं। लोगों को उम्मीद है कि फोरेंसिक परीक्षण के बाद मौतों की वास्तविक वजह सामने आएगी।

क्या इन मौतों के पीछे किसी जहरीले पदार्थ का इस्तेमाल हुआ? क्या यह महज संयोग था या फिर किसी सुनियोजित योजना का हिस्सा? इन तमाम सवालों के जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आ सकेंगे।

दहशत के साये में जी रहा पूरा गांव

लगातार आठ मौतों और कब्रों से शव निकाले जाने की घटनाओं के बाद खरवे गांव में भय का वातावरण बना हुआ है। लोग सहमे हुए हैं और सच सामने आने का इंतजार कर रहे हैं। फिलहाल पूरा गांव एक ऐसे रहस्य के बीच खड़ा है, जिसने न केवल स्थानीय लोगों बल्कि पूरे क्षेत्र का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।

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