
नई दिल्ली: तिब्बत में गुरुवार रात आए 7 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप से भारी नुकसान होने की खबर है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, इस प्राकृतिक आपदा में कम से कम 16 लोगों की मौत हो गई, जबकि 32 लोग घायल बताए जा रहे हैं। घायलों में 11 की हालत गंभीर बताई गई है। भूकंप के झटकों से कई इलाकों में मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं। राहत एवं बचाव दल मलबे में फंसे लोगों की तलाश में जुटे हैं।
173 किलोमीटर की गहराई में था भूकंप का केंद्र
नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (NCS) के मुताबिक, भारतीय समयानुसार रात करीब 8:03 बजे भूकंप के झटके महसूस किए गए। इसका केंद्र तिब्बत के नागकू शहर में जमीन से लगभग 173 किलोमीटर की गहराई में बताया गया। यह स्थान तिब्बत की राजधानी ल्हासा से करीब 400 किलोमीटर दूर है।
नागकू में सैकड़ों मकान ढहे, लोगों में मची अफरा-तफरी
भूकंप के झटके महसूस होते ही लोगों में अफरा-तफरी मच गई। मकान और वाहन हिलने लगे, जिसके बाद लोग अपनी जान बचाने के लिए घरों और होटलों से बाहर निकल आए। दुकानों के अंदर रखे सामान के रैक से गिरने की घटनाएं भी सीसीटीवी फुटेज में कैद हुईं।
रिपोर्ट के मुताबिक, नागकू शहर में भूकंप के कारण कम से कम 339 मकान ढह गए हैं। मलबे में दबे लोगों को निकालने के लिए बचाव अभियान चलाया जा रहा है। प्रभावित और विस्थापित लोगों को अस्थायी आश्रय उपलब्ध कराने के लिए टेंट लगाए जा रहे हैं।
पांच साल में क्षेत्र का सबसे बड़ा भूकंप
बताया जा रहा है कि यह पिछले पांच वर्षों में तिब्बत क्षेत्र में आया सबसे बड़ा भूकंप है। प्रशासन प्रभावित इलाकों में नुकसान का आकलन करने और लोगों तक राहत पहुंचाने में जुटा है। हालांकि, मृतकों और घायलों की संख्या में आगे बदलाव होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
पहले भी बाढ़ और भूस्खलन से प्रभावित हुआ था क्षेत्र
तिब्बत में यह भूकंप ऐसे समय आया है, जब हाल के दिनों में नेपाल और चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र की सीमा के आसपास बाढ़ और भूस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदाओं की घटनाएं सामने आई थीं। इन घटनाओं से कई इलाके प्रभावित हुए थे। ऐसे में भूकंप ने क्षेत्र में आपदा प्रबंधन और राहत कार्यों की चुनौतियां बढ़ा दी हैं।
तिब्बत में क्यों आते हैं बार-बार भूकंप?
तिब्बत भूकंप की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों में शामिल है। इसकी प्रमुख वजह भारतीय और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेटों के बीच लगातार होने वाली हलचल है। इन प्लेटों के आपस में टकराने से हिमालय पर्वत का निर्माण हुआ है। भूगर्भीय गतिविधियों के कारण इस क्षेत्र में समय-समय पर भूकंप आते रहते हैं।इससे पहले पश्चिमी नेपाल में तिब्बत सीमा के पास हिमलुंग हिमाल के बेस कैंप क्षेत्र में हिमस्खलन की घटना भी सामने आई थी, जिसमें 10 लोगों के लापता होने की खबर थी। लगातार सामने आ रही प्राकृतिक आपदाओं के कारण हिमालयी क्षेत्र में रहने वाले लोगों की सुरक्षा एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।




















