बीजापुर: छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में स्थित इंद्रावती टाइगर रिजर्व करीब चार दशक बाद एक बार फिर आम पर्यटकों के लिए खुलने जा रहा है। सुरक्षा कारणों और नक्सल प्रभाव के चलते लंबे समय से बंद रहे इस क्षेत्र में अब पर्यटन गतिविधियां शुरू करने की तैयारी तेज हो गई है। वन विभाग के अनुसार, 1 नवंबर 2026 से पर्यटकों को रिजर्व क्षेत्र में सफारी की सुविधा मिल सकती है।

करीब 40 साल से पर्यटकों की पहुंच से दूर था इलाका

इंद्रावती टाइगर रिजर्व वर्ष 1980 के दशक के मध्य से सुरक्षा चुनौतियों के कारण पर्यटकों के लिए लगभग पूरी तरह बंद रहा। लंबे समय तक नक्सल गतिविधियों के प्रभाव के चलते जंगल के बड़े हिस्से में सामान्य आवाजाही भी मुश्किल थी।अब सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होने और विकास कार्यों के आगे बढ़ने से वन विभाग के अधिकारी उन इलाकों तक पहुंच बनाने में सक्षम हो रहे हैं, जहां पहले जाना चुनौतीपूर्ण माना जाता था।

2,798 वर्ग किलोमीटर में फैला है टाइगर रिजर्व

इंद्रावती टाइगर रिजर्व का कोर क्षेत्र करीब 1,258 वर्ग किलोमीटर में फैला है, जबकि इसका बफर क्षेत्र लगभग 1,540 वर्ग किलोमीटर का है। इस तरह पूरा टाइगर रिजर्व करीब 2,798 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में विस्तृत है।यह क्षेत्र घने जंगलों और विविध वन्यजीवों के लिए जाना जाता है। खास तौर पर जंगली भैंसा यहां की प्रमुख वन्यजीव संपदा में शामिल है और यह इलाका उसके बचे हुए प्राकृतिक आवासों में से एक माना जाता है।

दो से तीन नए इलाकों में शुरू होगी सफारी

छत्तीसगढ़ के मुख्य वन अधिकारी अरुण पांडेय के अनुसार, 1 नवंबर से पर्यटन शुरू करने के लिए वन विभाग नई गाड़ियों की व्यवस्था करने के साथ सफारी रूट तैयार कर रहा है। शुरुआती चरण में दो से तीन नए क्षेत्रों को सफारी के लिए विकसित किए जाने की तैयारी है।सफारी के रास्ते और पर्यटन व्यवस्था को टाइगर कंजर्वेशन प्लान के नियमों के अनुरूप तैयार किया जा रहा है। इसके तहत यह भी तय किया जाएगा कि प्रतिदिन कितने वाहन और कितने पर्यटकों को रिजर्व क्षेत्र में प्रवेश दिया जा सकता है।

आदिवासी संस्कृति और वन्यजीवन से रूबरू होंगे पर्यटक

इंद्रावती टाइगर रिजर्व में पर्यटन शुरू करने का उद्देश्य केवल जंगल सफारी तक सीमित नहीं रहेगा। पर्यटकों को बस्तर की स्थानीय आदिवासी संस्कृति, प्राकृतिक परिवेश और वन्यजीवों को करीब से समझने का अवसर देने की योजना है।लंबे समय तक बंद रहे इस क्षेत्र में पर्यटन शुरू होने से स्थानीय स्तर पर भी नई गतिविधियां बढ़ने की उम्मीद है। हालांकि पर्यटकों की आवाजाही को नियंत्रित रखते हुए वन्यजीव संरक्षण और जंगल की प्राकृतिक व्यवस्था को प्राथमिकता दी जाएगी।

नक्सल प्रभाव घटने के बाद बदली तस्वीर

इंद्रावती के जंगलों में सुरक्षा और विकास से जुड़े काम आगे बढ़ने के साथ वन विभाग की गतिविधियां भी बढ़ी हैं। जिन क्षेत्रों में पहले सुरक्षा कारणों से पहुंच बनाना कठिन था, वहां अब अधिकारी और कर्मचारी काम कर पा रहे हैं।ऐसे में 1 नवंबर से पर्यटन शुरू करने की तैयारी को इंद्रावती क्षेत्र में लंबे समय बाद सामान्य गतिविधियों की वापसी के तौर पर भी देखा जा रहा है।

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