
Subhash Chandra debt waiver: एस्सेल ग्रुप के चेयरमैन सुभाष चंद्रा को नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) से बड़ा झटका लगा है. 22,006.57 करोड़ रुपये का लोन 6.25 करोड़ रुपये में निपटाने वाले मामले पर रोक लगा दी है. साथ ही साथ कोर्ट ने सुभाष चंद्रा अपनी किसी भी संपत्ति को बेचने या ट्रांसफर करने पर रोक लगा दी है. मतलब यह कि अब चंद्रा न तो अपनी संपत्ति किसी को बेंच सकते हैं और न ही ट्रांसफर कर सकते हैं. फिलहाल के लिए NCLT की 5-सदस्यीय बेंच ने रीपेमेंट प्लान पर रोक लगा दी है.
सुभाष चंद्रा मामला देशभर में चर्चा का विषय रहा, ऐसा इसलिए क्योंकि हजारों करोड़ का सैटलमेंट महज कुछ करोड़ में करने का आदेश दिया गया था. यही वजह है कि NCLT के इतिहास में पहली बार है, जब पांच सदस्यीय बेंच बनाई गई है. जिसने इस तरह के मामले की सुनवाई की.
पूरे मामले की सुनवाई स्पेशल बेंच की तरफ से मंगलवार को की गई. इस दौरान सुनवाई के दौरान पहले जारी किए गए आदेशों को लेकर बेंच के बीच ही मतभेद था. मतलब यह कि एकमद नहीं हो पा रहे थे. यही वजह है कि ऐसे में कोई नया फैसला लागू नहीं किया जा सकता है. ऐसे में पुराने आदेश पर रोक लगा दी है.
क्या था पुराना फैसला?
NCLT ने सुभाष चंद्रा के दिवालिया मामले में एक सेटलमेंट को मंजूरी दी थी. उस फैसले के तहत ₹22,006 करोड़ के कुल दावों के बदले चंद्रा को अपनी निजी संपत्ति से सिर्फ ₹6.25 करोड़ देने होंगे. लगभग 99.97 प्रतिशत का हेयरकट किया गया था. कोर्ट का यह भी मानना था कि अगर चंद्रा को जबरन दिवालिया घोषित किया जाता है, तो बैंकों को मिलने वाली रिकवरी और भी कम हो सकती है. यही वजह है कि इस तरह का फैसला लिया गया है.
NCLT के इस फैसले के बाद ही पूरा वबाल शुरू हुआ था. मामला इतना बड़ा हुआ कि सुभाष चंद्रा ने खुद सामने आकर सफाई दी. इसके बाद पूरे मामले की जांच NCLT की पांच सदस्यीय बेंच को सौंप दी गई.



















