नई दिल्ली: कर्नाटक की शृंगेरी विधानसभा सीट के चुनाव परिणामों से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने भारत निर्वाचन आयोग से 2023 की मतगणना की वीडियो रिकॉर्डिंग उपलब्ध नहीं होने पर जवाब तलब किया है। जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस संजीव सचदेवा की पीठ ने आयोग की दलील पर नाराजगी जताते हुए कहा कि चुनाव कराने वाली संस्था के पास संबंधित प्रक्रिया के दस्तावेज और रिकॉर्ड होने चाहिए। अदालत ने चेतावनी दी कि अगली सुनवाई तक उपलब्ध रिकॉर्ड प्रस्तुत नहीं किए गए, तो आयोग के खिलाफ प्रतिकूल निष्कर्ष निकाले जा सकते हैं।

वीडियो रिकॉर्डिंग नहीं मिलने पर आयोग की दलील से असंतुष्ट अदालत

सुनवाई के दौरान निर्वाचन आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता शेषाद्रि नायडू ने बताया कि वर्ष 2023 में हुई मूल मतगणना का वीडियो फिलहाल नहीं मिल रहा है और उसे तलाशने के प्रयास किए जा रहे हैं।इस पर पीठ ने सवाल उठाया कि चुनाव कराने की जिम्मेदारी निभाने वाले आयोग के पास अपनी ही प्रक्रिया से जुड़े रिकॉर्ड उपलब्ध क्यों नहीं हैं। अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिया कि अगली सुनवाई के दौरान आयोग अपने पास मौजूद सभी संबंधित दस्तावेज और रिकॉर्ड पेश करे।मामले की अगली सुनवाई 15 फरवरी 2027 को होगी। कोर्ट की चेतावनी के बाद अब आयोग को उपलब्ध साक्ष्यों और दस्तावेजों के आधार पर अपनी स्थिति स्पष्ट करनी होगी।

201 वोटों के अंतर से जीत के बाद शुरू हुई कानूनी लड़ाई

यह विवाद कर्नाटक विधानसभा चुनाव 2023 में शृंगेरी सीट के नतीजे से जुड़ा है। मूल मतगणना में कांग्रेस नेता टीडी राजेगौड़ा को भाजपा उम्मीदवार डीएनए जीवराज के मुकाबले 201 वोटों से विजयी घोषित किया गया था।जीवराज ने चुनाव परिणाम को कर्नाटक हाई कोर्ट में चुनौती दी। अप्रैल 2026 में हाई कोर्ट ने डाक मतपत्रों की दोबारा गिनती कराने का आदेश दिया। इसके बाद 3 मई 2026 को घोषित संशोधित परिणाम में राजेगौड़ा के मतों की संख्या घट गई और जीवराज को विजेता घोषित कर दिया गया।इस बदलाव के बाद चुनाव परिणाम को लेकर विवाद और गहरा गया। मामला अब सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है।

279 खारिज मतपत्रों की जांच के आदेश पर उठाया सवाल

हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए टीडी राजेगौड़ा ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। शीर्ष अदालत ने उन्हें अंतरिम राहत देते हुए फिलहाल विधायक पद पर बने रहने की अनुमति दी थी।राजेगौड़ा का कहना है कि हाई कोर्ट ने केवल 279 खारिज किए गए डाक मतपत्रों की दोबारा जांच का निर्देश दिया था। उनके आरोप के मुताबिक, चुनाव अधिकारी ने इस सीमा से आगे बढ़कर 562 वैध डाक मतपत्रों का भी पुनर्मूल्यांकन किया।राजेगौड़ा ने इस प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए पर्यवेक्षक की रिपोर्ट और मूल मतगणना तथा पुनर्गणना की वीडियो रिकॉर्डिंग उपलब्ध कराने की मांग की थी। उनका कहना है कि इन दस्तावेजों से मतगणना की प्रक्रिया और अपनाई गई कार्रवाई की जांच करने में मदद मिलेगी।

अगली सुनवाई में रिकॉर्ड पेश करने का निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने निर्वाचन आयोग को निर्देश दिया है कि वह अगली तारीख पर उपलब्ध सभी संबंधित रिकॉर्ड अदालत के सामने रखे। पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि रिकॉर्ड प्रस्तुत नहीं किए जाने की स्थिति में आयोग के खिलाफ प्रतिकूल कानूनी निष्कर्ष निकाले जा सकते हैं।अब इस मामले में 15 फरवरी 2027 को सुनवाई होगी। अदालत के सामने प्रस्तुत किए जाने वाले दस्तावेज यह स्पष्ट करने में महत्वपूर्ण हो सकते हैं कि मतगणना और पुनर्गणना के दौरान कौन सी प्रक्रिया अपनाई गई थी तथा संबंधित वीडियो रिकॉर्डिंग की स्थिति क्या है।

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