पटना: बिहार की राजधानी पटना में साइबर ठगी की रकम एटीएम से निकालने और बदले में कमीशन लेने के आरोप में पुलिस ने एक युवक को गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान बबलू कुमार के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, उसके पास से अलग-अलग बैंकों के 15 एटीएम कार्ड और दो मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं। शुरुआती जांच में करीब 50 से 60 लाख रुपये के संदिग्ध लेनदेन का पता चला है। पुलिस अब बैंक खातों, डिजिटल साक्ष्यों और कथित गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।

रामकृष्ण नगर में छापेमारी के दौरान गिरफ्तारी

पुलिस ने रामकृष्ण नगर थाना क्षेत्र में छापेमारी कर बबलू कुमार को पकड़ा। तलाशी के दौरान मिले एटीएम कार्ड और मोबाइल फोन जांच का अहम हिस्सा बन गए हैं। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि कार्ड किन बैंक खातों से जुड़े हैं, खाते किसके नाम पर हैं और उनका इस्तेमाल किन लेनदेन के लिए किया गया।

जांच एजेंसियां बरामद मोबाइल फोन में मौजूद संपर्कों और डिजिटल जानकारी के साथ बैंकिंग रिकॉर्ड का मिलान कर रही हैं। इससे कथित नेटवर्क के दूसरे सदस्यों और रकम के लेनदेन की कड़ियों का पता लगाने में मदद मिल सकती है।

ऑनलाइन ट्रेडिंग में घाटे के बाद कर्ज बढ़ने का दावा

पुलिस पूछताछ के हवाले से सामने आई जानकारी के अनुसार, बबलू कुमार भौतिकी से स्नातक है। बताया गया है कि ऑनलाइन ट्रेडिंग में नुकसान होने के बाद उस पर करीब पांच से छह लाख रुपये का कर्ज हो गया था। पुलिस का आरोप है कि इसी दौरान वह राजस्थान में साइबर अपराधियों के संपर्क में आया और उनके लिए काम करने लगा।

जांच के मुताबिक, उसने उत्तर प्रदेश के बस्ती में भी बैंक खाते खुलवाए थे। संदिग्ध लेनदेन के चलते खाते ब्लॉक होने के बाद उसके पटना लौटने की बात सामने आई है। हालांकि, ट्रेडिंग में नुकसान और कर्ज को अपराध से जुड़ने की वजह बताए जाने की पुष्टि जांच के दौरान उपलब्ध साक्ष्यों से होनी बाकी है।

ठगी की रकम निकालने पर मिलता था 5 से 8 प्रतिशत कमीशन

पुलिस का आरोप है कि बबलू दूसरे लोगों के बैंक खातों में साइबर ठगी से आई रकम को एटीएम के जरिए निकालता था। इसके बदले उसे कथित तौर पर पांच से आठ प्रतिशत तक कमीशन दिया जाता था। निकाली गई बाकी रकम गिरोह से जुड़े अन्य लोगों तक पहुंचाई जाती थी।

पुलिस की जांच में रोहतास की एक महिला की भूमिका भी सामने आने की बात कही गई है। संगीता नाम की साइबर डीएसपी के हवाले से प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, शुरुआती पड़ताल में लगभग 50 से 60 लाख रुपये के संदिग्ध लेनदेन का पता चला है। हालांकि, इस रकम की अंतिम पुष्टि विस्तृत वित्तीय जांच के बाद ही हो सकेगी।

साइबर क्राइम पोर्टल पर करीब 40 शिकायतों का जिक्र

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, आरोपी से संबंधित करीब 40 शिकायतें साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर दर्ज होने की जानकारी मिली है। जांच एजेंसियां इन शिकायतों में दर्ज रकम, लेनदेन की तारीख और संबंधित बैंक खातों का मिलान कर रही हैं।

हालांकि, शिकायतों की संख्या अपने आप में किसी व्यक्ति के दोषी होने का प्रमाण नहीं है। प्रत्येक शिकायत में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर यह जांचना जरूरी होगा कि संबंधित व्यक्ति की भूमिका क्या थी और संदिग्ध रकम का उससे किस तरह संबंध बनता है।

बैंक खातों और मोबाइल फोन की जांच से खुल सकती हैं अहम कड़ियां

इस मामले में पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती ठगी की रकम के स्रोत और उसके अंतिम गंतव्य का पता लगाना है। किसी बैंक खाते में संदिग्ध रकम आने, एटीएम से उसे निकालने और ठगी की साजिश में शामिल होने की भूमिकाएं अलग-अलग हो सकती हैं। इसलिए जांच में यह स्पष्ट करना होगा कि किस व्यक्ति को लेनदेन की जानकारी थी और किसने किसके निर्देश पर काम किया।

मोबाइल फोन में मौजूद संपर्कों, डिजिटल रिकॉर्ड और बैंकिंग विवरणों का मिलान कर पुलिस कथित नेटवर्क की गतिविधियों को समझने का प्रयास कर रही है। इन साक्ष्यों से यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि रकम किन खातों में आई और आगे किन लोगों तक पहुंची।

पूरे नेटवर्क की भूमिका स्पष्ट होना बाकी

बबलू कुमार की गिरफ्तारी के बाद पुलिस अब कथित सहयोगियों और संदिग्ध बैंक खातों की कड़ियों की जांच कर रही है। बरामद एटीएम कार्ड, मोबाइल फोन और वित्तीय रिकॉर्ड की पड़ताल के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

फिलहाल आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों की जांच जारी है। मामले में उसकी वास्तविक भूमिका, संदिग्ध लेनदेन की कुल रकम और अन्य लोगों की संलिप्तता का अंतिम निर्धारण जांच में सामने आने वाले साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होगा।

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