
रायपुर ; रेल मंडल से जुड़े टिकट दलाली के मामले में जांच का दायरा अब रेलवे के एक कमर्शियल कर्मचारी तक पहुंच गया है। अंबिकापुर आरपीएफ ने भिलाई में पदस्थ एक कमर्शियल स्टॉफ को टिकट दलालों के संपर्क में रहने के आरोपों को लेकर पूछताछ के लिए तलब किया है। सूत्रों के अनुसार कर्मचारी अपने वकील के माध्यम से अंबिकापुर आरपीएफ पोस्ट पहुंचकर जांच में शामिल हो सकते हैं।हालांकि, कर्मचारी की भूमिका और उस पर लगे आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
कई वर्षों के संपर्क और लेनदेन की बात सामने आई
सूत्रों का दावा है कि संबंधित कर्मचारी पिछले 3 से 4 वर्षों से टिकट दलालों के संपर्क में था। इस दौरान कर्मचारी और दलालों के बीच बड़ी संख्या में वित्तीय लेनदेन होने की बात भी सामने आ रही है। इसी वजह से जांच एजेंसियों की नजर अब पुराने बैंकिंग रिकॉर्ड और कथित लेनदेन के पैटर्न पर है।मामले में टिकट दलाल प्रेम दुबे से जुड़े लेनदेन के सुराग को जांच के लिहाज से अहम माना जा रहा है। इसी कड़ी के आधार पर कमर्शियल स्टॉफ से पूछताछ किए जाने की बात सामने आई है।
लंबे समय तक नेटवर्क चलने की जानकारी क्यों नहीं मिली?
इस पूरे मामले ने रेलवे सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि संबंधित कर्मचारी लंबे समय से टिकट दलालों के संपर्क में था और लगातार लेनदेन हो रहा था, तो रायपुर रेल मंडल की आरपीएफ, टास्क टीम, सीआईबी और अन्य निगरानी इकाइयों को इसकी जानकारी पहले क्यों नहीं मिली, यह जांच का महत्वपूर्ण बिंदु बन गया है।एक दिन पहले ही अंबिकापुर आरपीएफ ने इसी मामले में नौवें आरोपी को गिरफ्तार किया था। बताया गया कि गिरफ्तार आरोपी रेलवे कर्मचारी है। इसके बाद अब जांच की दिशा रेलवे के अन्य कर्मचारियों और टिकट दलाली नेटवर्क के बीच संभावित कनेक्शन की ओर भी जाती दिखाई दे रही है।
बैंक खाते की जांच से सामने आ सकती है पूरी तस्वीर
जांच में संबंधित कमर्शियल स्टॉफ के बैंक खातों की पिछले 3 से 4 वर्षों की गतिविधियां अहम साबित हो सकती हैं। बैंकिंग रिकॉर्ड की जांच से यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि टिकट दलालों और कर्मचारी के बीच कितनी रकम का लेनदेन हुआ और भुगतान का स्वरूप क्या था।यदि कथित तौर पर टिकट बुकिंग या कमीशन के नाम पर रकम का आदान-प्रदान हुआ है, तो बैंक रिकॉर्ड उसकी कड़ियों को जोड़ने में महत्वपूर्ण सबूत बन सकते हैं।
अब निगाह रायपुर रेल मंडल की अगली कार्रवाई पर
मामले में बड़ा सवाल यह है कि क्या रायपुर रेल मंडल के सीनियर आरपीएफ कमांडेंट पूरे प्रकरण की अलग से जांच कराएंगे। इसके अलावा यह भी देखा जा रहा है कि जांच मंडल स्तर पर होगी या जोन स्तर की टीम को इसमें शामिल किया जाएगा।फिलहाल आरपीएफ की पूछताछ के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि संबंधित कर्मचारी की भूमिका क्या रही और टिकट दलाली के नेटवर्क से उसका संपर्क किस स्तर तक था। जांच के दौरान बैंक रिकॉर्ड, कॉल डिटेल और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की पड़ताल इस मामले की दिशा तय कर सकती है।



















