मध्य प्रदेश : नगरीय निकायों में जेम पोर्टल और स्थानीय टेंडर-कोटेशन के माध्यम से की गई खरीदी में वित्तीय और प्रक्रियागत अनियमितताओं का मामला सामने आया है। शासन को सौंपी गई विभागीय जांच रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश के आठ संभागों में सामने आए 62 प्रकरणों में 146 अधिकारी-कर्मचारियों को जिम्मेदार पाया गया है। जांच में महंगी दरों पर सामग्री खरीदने, जरूरी मंजूरी के बिना भुगतान या खरीदी करने और निर्धारित नियमों का पालन नहीं करने जैसे मामले शामिल है।रिपोर्ट में संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ सेवा से हटाने, वेतनवृद्धि रोकने, पेंशन संबंधी कटौती और आर्थिक नुकसान की वसूली जैसी कार्रवाई का विवरण दिया गया है। हालांकि, जांच में कुछ अधिकारी-कर्मचारी आरोपमुक्त भी किए गए है।

ग्वालियर संभाग में सबसे अधिक मामले

विभागीय रिपोर्ट में आठ संभागों के कुल 62 प्रकरणों का उल्लेख है। संभागवार विवरण इस प्रकार है:

  • ग्वालियर: 16 प्रकरणों में 32 अधिकारी-कर्मचारी
  • शहडोल: 10 प्रकरणों में 25 अधिकारी-कर्मचारी
  • इंदौर: 7 प्रकरणों में 21 अधिकारी-कर्मचारी
  • उज्जैन: 8 प्रकरणों में 21 अधिकारी-कर्मचारी
  • जबलपुर: 6 प्रकरणों में 15 अधिकारी-कर्मचारी

रिपोर्ट में अन्य संभागों के मामले भी शामिल है। जांच का मुख्य विषय नगरीय निकायों में खरीदी की प्रक्रिया, वित्तीय मंजूरी और सरकारी धन के इस्तेमाल से जुड़े नियमों का पालन रहा।

सिवनी, कोटर और गुना की खरीदी पर उठे सवाल

जांच रिपोर्ट में नगर पालिका सिवनी का मामला शामिल है। यहां हाईमास्ट पोल, हाईमास्ट लाइट, LED लाइट और सौंदर्यीकरण से संबंधित सामग्री की दो करोड़ रुपये से अधिक की खरीदी में अनियमितताओं का उल्लेख किया गया है।नगर परिषद कोटर में वाटर टैंकर और ट्रैक्टर-ट्रॉली की खरीदी के दौरान दरों से संबंधित गड़बड़ी दर्ज की गई। वहीं, नगर पालिका गुना में सक्षम वित्तीय और प्रशासनिक स्वीकृति के बिना 20 के बजाय 10 कचरा वाहन खरीदने का मामला भी जांच में सामने आया।इन प्रकरणों में खरीदी की प्रक्रिया और संबंधित मंजूरियों को लेकर सवाल उठाए गए है।

टेंडर और कोटेशन में नियमों के उल्लंघन के मामले

स्थानीय निविदा और कोटेशन के माध्यम से खरीदी में भी कई तरह की अनियमितताओं का जिक्र है।

  • तरीचरकलां: आवश्यकता की सामग्री अधिक दरों पर खरीदने से शासन को 26.16 लाख रुपये की क्षति होने का उल्लेख है।
  • पेटलावद: सरकारी दुकान आवंटन में नियमों की अनदेखी से 19.87 लाख रुपये के नुकसान का मामला दर्ज है।
  • धार: भुगतान से जुड़ी अनियमितता के प्रकरण में 1.43 लाख रुपये की वसूली का उल्लेख किया गया है।
  • ब्यौहारी: सामग्री की अधिक दरों पर खरीदी के मामले में वसूली और वेतनवृद्धि रोकने संबंधी कार्रवाई का विवरण दिया गया है।

रिपोर्ट में इन मामलों के आधार पर संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ की गई विभागीय कार्रवाई का ब्योरा शामिल किया गया है।

7 कर्मचारियों को सेवा से हटाया, 76 की वेतनवृद्धि पर कार्रवाई

विभागीय रिपोर्ट के मुताबिक, अलग-अलग प्रकरणों में की गई कार्रवाई का विवरण इस प्रकार है:

  • 7 कर्मचारियों को सेवा से पदच्युत किया गया।
  • 76 मामलों में एक से चार वेतनवृद्धियां रोकने या निरस्त करने की कार्रवाई की गई।
  • 17 सेवानिवृत्त कर्मचारियों की पेंशन या महंगाई राहत में कटौती का उल्लेख है।
  • 38 मामलों में आर्थिक नुकसान की वसूली के आदेश दिए गए।
  • 22 अधिकारी-कर्मचारियों को आरोपमुक्त किया गया।
  • 5 मामलों में परिनिंदा या चेतावनी दी गई।
  • 2 मामलों में संबंधित कर्मचारियों की मृत्यु के कारण कार्रवाई समाप्त की गई।

ये आंकड़े रिपोर्ट में दर्ज विभागीय कार्रवाई को दर्शाते है। अलग-अलग प्रकरणों में कार्रवाई का स्वरूप आरोपों और जांच के निष्कर्षों के आधार पर तय किया गया।

करोड़ों रुपये की क्षति से जुड़े मामले भी रिपोर्ट में शामिल

रिपोर्ट में शहडोल संभाग की कुछ नगर परिषदों में नियमों के विरुद्ध संविलियन से करीब 3.20 करोड़ रुपये की आर्थिक क्षति होने का उल्लेख है।इसके अलावा सीहोर क्षेत्र में सड़क निर्माण से जुड़े एक मामले में 29.08 लाख रुपये की क्षति का विवरण दिया गया है। बिजुरी में अलग-अलग प्रकरणों में 26.78 लाख रुपये और 19 लाख रुपये से अधिक की अनियमितताओं का भी जिक्र है।इन मामलों में सरकारी धन के उपयोग, स्वीकृति प्रक्रिया और नियमों के पालन से जुड़े पहलुओं की जांच की गई।

नगरीय विकास विभाग की समीक्षा बैठक का वीडियो भी चर्चा में

अक्टूबर 2026 में भोपाल के भौंरी में नगरीय विकास एवं आवास विभाग की आंतरिक समीक्षा बैठक का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। वीडियो में IAS अधिकारी संजय दुबे विभागीय अधिकारियों और नगर निकायों के प्रमुखों से सवाल करते और खरीदी तथा प्रशासनिक कामकाज को लेकर नाराजगी जताते दिखाई दिए।हालांकि, उपलब्ध विवरण से यह स्पष्ट नहीं होता कि वायरल वीडियो में उठाए गए सभी मुद्दे विभागीय जांच रिपोर्ट के 62 प्रकरणों से सीधे जुड़े हुए है या नहीं। दोनों मामलों के बीच संबंध की पुष्टि के लिए आधिकारिक जानकारी जरूरी होगी।नगरीय निकायों में खरीदी से जुड़ी यह रिपोर्ट सरकारी खरीद प्रक्रिया में नियमों के पालन, वित्तीय मंजूरी और जवाबदेही के महत्व को सामने लाती है।

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