Nepal Floods Update:  नेपाल में बाढ़ और भूस्खलन से हुई भारी तबाही के बाद राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। 31 अगस्त तक सामने आए आंकड़ों के अनुसार, आपदा में 955 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि करीब 4,400 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं।नेपाल-तिब्बत सीमा से लगे पहाड़ी इलाकों में आपदा ने सड़क, पुल और बिजली से जुड़ी कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं को नुकसान पहुंचाया है। भूस्खलन और मलबे के कारण कई इलाकों का संपर्क भी प्रभावित हुआ है।

हाइड्रोपावर सुरंगों में फंसे लोगों को निकालना सबसे बड़ी चुनौती

रेस्क्यू टीमों के सामने सबसे कठिन काम हाइड्रोपावर परियोजनाओं की सुरंगों में फंसे लोगों को बाहर निकालना है। अधिकारियों के मुताबिक करीब 933 हाइड्रोपावर कर्मचारी लापता हैं।कई सुरंगों के प्रवेश द्वार मिट्टी, बड़े पत्थरों और भारी मलबे से पूरी तरह बंद हो गए हैं। नेपाली सेना और विशेषज्ञ टीमें भारी मशीनों के साथ नियंत्रित विस्फोट की मदद से रास्ते खोलने में जुटी हैं। सुरंगों के भीतर पहुंचने के लिए उपलब्ध तकनीकी संसाधनों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है।

भारत समेत कई देशों की टीमें राहत अभियान में जुटीं

नेपाल के सुरक्षा बलों के साथ भारत, चीन और दक्षिण कोरिया के विशेषज्ञ भी बचाव अभियान में सहयोग कर रहे हैं। करीब 21 हजार सुरक्षाकर्मी अलग-अलग क्षेत्रों में राहत और रेस्क्यू ऑपरेशन में लगाए गए हैं।हालांकि दुर्गम पहाड़ी इलाकों और खराब मौसम ने अभियान को बेहद मुश्किल बना दिया है। कई सड़कें बाढ़ और भूस्खलन में बह जाने से प्रभावित क्षेत्रों तक राहत सामग्री पहुंचाना भी चुनौती बन गया है।

तिब्बत में भी आपदा का असर

इस प्राकृतिक आपदा का प्रभाव नेपाल की सीमा से आगे चीन के तिब्बत क्षेत्र तक पहुंचा है। वहां कम से कम 16 लोगों की मौत की सूचना है, जबकि 546 लोग लापता बताए जा रहे हैं।चीन ने बचाव अभियान को तेज करने के लिए 2,100 से अधिक रेस्क्यू कर्मियों को तैनात किया है। नेपाल में सुरंगों के भीतर फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए भी चीन की ओर से विशेषज्ञ सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।

90 हजार से अधिक लोग प्रभावित

रेड क्रॉस के अनुमान के मुताबिक नेपाल में इस आपदा से 90 हजार से ज्यादा लोग प्रभावित हुए हैं। बड़ी संख्या में परिवार अपने लापता परिजनों की जानकारी मिलने का इंतजार कर रहे हैं।वहीं अस्पतालों में मिले शवों की पहचान करना और उन्हें सुरक्षित रखना भी प्रशासन के सामने एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।

भोजन और पानी के साथ लापता लोगों की तलाश पर जोर

अधिकारियों के अनुसार इस आपदा को ग्लेशियर टूटने से आई अचानक तेज बाढ़ से जोड़कर देखा जा रहा है। फिलहाल राहत एजेंसियों का ध्यान प्रभावित आबादी तक भोजन, पेयजल और जरूरी सामान पहुंचाने के साथ लापता लोगों की तलाश तेज करने पर है।दुर्गम क्षेत्रों में मलबा हटाने और संपर्क बहाल करने का काम भी समानांतर रूप से चल रहा है। बचाव दलों के लिए आने वाले दिन बेहद महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि कई इलाकों में अब भी लोगों के मलबे और बंद सुरंगों में फंसे होने की आशंका बनी हुई है।

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